इसबगोल की फसल को देख खुश हो उठे धरतीपुत्र, बादलों की आवाजाही से सताने लगी है चिंता

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धुंधाड़ा/जोधपुर. कस्बे में व्यापक स्तर पर घोड़े जीरे की फसल जिसे इसबगोल कहा जाता है, को देखकर किसानों के चेहरे पर खुशी छाई हुई है। प्रगतिशील किसान अजय चौधरी ने बताया कि घोड़ा जीरा जिसे इसबगोल कहा जाता है, की फसल तो व्यापक स्तर पर हुई है, लेकिन किसानों को एक अंदेशा हमेशा सताता रहता है कि अब जब फसल लेने का समय आ गया है तो यदि प्रकृति ने साथ नहीं दिया तो किसान कहीं के नहीं रहेंगे। प्रकृति ने साथ दिया भगवान ने साथ दिया और फसलें भी जोरदार हुई, लेकिन अब बादलों की आवाजाही के चलते किसानों को चिंता सता रही है।

रोहिड़े ने किया फूलों का शृंगार
मथानिया. राजस्थान के सागवान के रूप में प्रसिद्ध रोहिड़े के पेड़ इन दिनों पुष्प गुच्छों से लदे हुए हैं। पेड़ों पर रंग-बिरंगे फूलों की छटा हर किसी को आकर्षित करती है। मथानिया क्षेत्र के दूर-दराज गांवों व ढाणियों के खेतों में मरुशोभा व राज्य का सागवान कहे जाने वाले रोहिड़े के वृक्षों ने फूलों का शृंगार किया है। एक ओर पतझड़ के मौसम में जहां दूसरें पेड़ों के पत्ते झड़ रहे हैं, वहीं रोहिड़े के वृक्ष फूलों से आच्छादित होकर प्रकृति की अनुपम छटा बिखेर रहे हैं। मथानिया इलाके में रोहिड़े के वृक्ष तीन अलग-अलग रंगों वाले फूलों से लदे नजर आ रहे हैं। क्षेत्र में गहरे पीले, हल्का पीला तथा लाल रंग के फूलों वाले रोहिड़े के वृक्ष खेतों की शोभा बढ़ा रहे हैं। रोहिड़े के पुष्प को 1983 में राजस्थान का राज्य पुष्प घोषित किया गया था।



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