जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने चिकित्सा शिक्षा विभाग को संभागीय मुख्यालयों पर स्थित नारी निकेतनों, बालिका गृहों तथा संप्रेक्षण गृहों का मेडिकल कॉलेज की चिकित्सकों की टीम से द्विमासिक विजिट सुनिश्चित करने के लिए योजना तैयार करने को कहा है।
न्यायाधीश संदीप मेहता तथा न्यायाधीश विजय बिश्नोई की खंडपीठ में एक याचिका की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता पंकज शर्मा ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के विशेषाधिकारी (विधि) की ओर से अतिरिक्त शपथ पत्र पेश करते हुए बताया कि जयपुर को छोडकऱ संभागीय मुख्यालयों पर स्थित नारी निकेतनों में छह एएनएम को प्रतिनियुक्ति दे दी गई है। जयपुर में पूर्व में ही एएनएम प्रतिनियुक्त है। सातों नारी निकेतनों के लिए विशेष महिला प्रशिक्षक के सात पद सृजित किए गए हैं। संभागीय नारी निकेतनों में मेडिकल कॉलेज प्रशासन नियमित विजिट पर चिकित्सकों का दल भेज सकता है।
इस पर खंडपीठ ने अतिरिक्त महाधिवक्ता मनीष व्यास को चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से चिकित्सकों की द्विमासिक विजिट सुनिश्चित करने की योजना तैयार करने के निर्देश दिए। खंडपीठ ने कहा कि नारी निकेतनों, बालिका गृहों जैसे संस्थानों में ओपन एयर जिम स्थापित करने के निर्देशों की पालना नहीं हो पाई है। इस पर बताया गया कि स्थानीय निकायों के पास ओपन एयर जिम स्थापित करने के संसाधन उपलब्ध है। कोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता सुनील बेनीवाल को स्थानीय निकाय विभाग के सचिव के समक्ष यह मामला उठाने और अगली सुनवाई से पहले पालना रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।
कोर्ट ने निकेतनों में बंद महिलाओं के लिए कौशल विकास कोर्स प्रारंभ करने की योजना पर अमल नहीं करने पर असंतोष जताया। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने नारी निकेतनों के निरीक्षण के लिए एक समान फार्मेट तैयार किए जाने की जानकारी दी, जिस पर खंडपीठ ने इसी फार्मेट में निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने के निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 18 मई को मुकर्रर की।
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