जेएनवीयू के राजनीति विज्ञान विभाग में पीएचडी कर रहे विद्यार्थियों के भविष्य पर लटकी तलवार, शिक्षक भी हुए परेशान

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गजेंद्रसिंह दहिया/जोधपुर. जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में पीएचडी शुरू होने से पहले ही दो सुपरवाइजर शिक्षकों ने पीएचडी कराने से इनकार कर दिया है। एक अन्य सुपरवाइजर ने बगैर पूछे स्कोलर एलॉट करने पर आपत्ति दर्ज कराई है। ऐसे में फिलहाल 21 विद्यार्थी पीएचडी शुरू होने से पहले ही परेशानी में आ गए हैं। इसमें से 14 विद्यार्थियों के लिए विवि को स्कोलर बदलने पड़ेंगे।

पिछले साल जेएनवीयू के राजनीति विज्ञान विभाग ने प्री पीएचडी टेस्ट में 16 विद्यार्थियों के लिए विज्ञप्ति निकाली थी, लेकिन इस साल जनवरी में कोर्स वर्क शुरू होने तक 72 विद्यार्थियों को प्रवेश दे दिया गया। विवि ने नाते-रिश्तेदारों और दोस्तों को प्रवेश दिलाने के लिए सीटों की संख्या करीब पांच गुणा तक बढ़ा दी। इसके लिए विवि ने कइयों को बगैर पूछे पहली बार सुपरवाइजर नियुक्त किया। इन 72 विद्यार्थियों के 6 सुपरवाइजर विवि के राजनीति विज्ञान विभाग के हैं, जबकि 9 सुपरवाइजर विवि से सम्बद्ध संभाग की राजकीय कॉलेजों के हैं। गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने इस संबंध में तीन फरवरी को ‘जेएनवीयू में थोक में डॉक्टरेट की डिग्री’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर इस मामले का खुलासा किया था।

केवल पीएचडी डिग्री से मतलब, कैसे होगी पता नहीं
राजकीय महाविद्यालय आहोर की लेक्चरर डॉ. सुशीला गौड़ पिछले लंबे समय से बीमार हैं। उनको 7 विद्यार्थी पीएचडी के लिए दिए गए हैं। गौड़ ने विवि प्रशासन को पत्र लिखकर अपने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए सुपरवाइजर बनने से इनकार कर दिया। गौर करने लायक बात यह भी है कि सुशीला को सुपरवाइजर बनाने से पहले विवि ने उनसे पूछना तक उचित नहीं समझा। राजकीय महाविद्यालय ओसियां की लेक्चरर डॉ. अरुणा बी कुमार चार महीने बाद जून में सेवानिवृत्त होने जा रही है। ऐसे में उन्होंने भी पीएचडी कराने में असमर्थता जाहिर कर दी। इनको भी 7 विद्यार्थी एलॉट किए गए हैं।

छात्रों ने फोन किया, तब पता चला पीएचडी करानी है
राजनीति विज्ञान की विभागीय परिषद की बैठक में मनमर्जी से सभी सुपरवाइजर्स को विद्यार्थी एलॉट किए गए। राजकीय महाविद्यालय जैसलमेर के शिक्षक डॉ. अशोक तंवर को 7 विद्यार्थी एलॉट किए गए हैं, लेकिन विद्यार्थी एलॉट करने से पहले इनसे भी सलाह तक नहीं ली गई। कुछ विद्यार्थियों ने जब तंवर को फोन करके बताया कि वे पीएचडी के लिए उनके सुपरइवाजर है, तब तंवर को इसकी सूचना मिली। उन्होंने विद्यार्थियों को पीएचडी कराने से मना कर दिया और विभाग में अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।

परेशान सुपरवाइजर बोले
‘मुझे हार्ट, ब्रेन ट्यूमर, बीपी, शुगर की बीमारी है। अब तो आंखों का भी ऑपरेशन हो गया। ऐसे में मैं कहां से पीएचडी करा पाऊंगी।’
- डॉ. सुशीला गौड़, राजकीय महाविद्यालय आहोर

‘मैं तो 4 महीने बाद रिटायर होने जा रही हूं इसलिए पीएचडी कराने में असमर्थता जाहिर की है।’
-डॉ. अरुणा बी कुमार, राजकीय महाविद्यालय, ओसियां

‘लडक़े ही सीधे फोन करके कहते हैं कि आप हमारे सुपरवाइजर हो। विवि को कम से कम मुझसे सलाह तो लेनी चाहिए कि मैं कौनसा टॉपिक पढ़ा पाऊंगा और कौनसा नहीं।’
- डॉ. अशोक तंवर, राजकीय महाविद्यालय, जैसलमेर



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