अविनाश केवलिया/जोधपुर. प्रदेश के अधिकांश नगरीय निकाय गीले कचरे का डिसेंट्रलाइज तरीके निस्तारण करने के सम्बंध में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से जारी गाइड लाइन लागू कर पाने में विफल हो गए हैं। ऑन साइट निस्तारण की व्यवस्था में भी सफलता नहीं मिली। अब स्वायत्त शासन विभाग ने सख्ती बरतते हुए सभी निकायों से सात दिन में की गई कार्रवाई का ब्यौरा मांगा है।
घरों से निकलने वाले गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग संग्रहीत कर गीले कचरे का कम्पोस्टिंग के जरिये निस्तारण भी करना था। लेकिन यह प्रणाली भी विकसित नहीं हो सकी। हाल ही सम्पन्न स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 में भी इस प्रक्रिया के लिए अलग से अंक थे, लेकिन किसी निकाय ने पालना रिपोर्ट पेश नहीं की।
क्या करना था
बल्क वेस्ट जनरेट करने वाले संस्थानों को डिसेंट्रलाइज तरीके से कम्पोस्ट करने को प्रेरित करना था। निकायों को स्वयं भी गीले कचरे का निस्तारण कम्पोस्टिंग से करना है। जिससे नगरीय निकायों को कचरे के परिवहन एवं केन्द्रीयकृत प्रोसेसिंग के खर्च को कम किया जा सके।
भारत सरकार ने सुझाए समाधान
गीले कचरे के निस्तारण के लिए भारत सरकार ने एक एडवाइजरी जारी की थी। यह ‘ऑनसाइट एंड डिसेंट्रलाइज्ड कम्पोस्टिंग ऑफ म्यूनिसिपल ऑर्गेनिक वेस्ट’ पर आधारित थी। इस आधार पर ही प्रदेश के निकायों को गीले कचरे का निस्तारण करना था।
सात दिन में पेश करनी है पालना रिपोर्ट
निदेशक व संयुक्त सचिव स्वायत्त शासन विभाग उज्जवल राठौड़ ने अब प्रदेश के सभी निकायों को 7 दिन में पालना रिपोर्ट पेश करने को कहा है। साथ ही अब तक ही प्रगति नहीं होने पर असंतोष भी जताया है।
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