जोधपुर. शीतकाल में जोधपुर के आस-पास के तालाबों पर आने वाले दुर्लभ प्रवासी पक्षियों के सतरंगी संसार से शहर की विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को रूबरू करवाने के लिए ‘राजस्थान पत्रिका’ की ओर से दूसरी बार बर्ड फेयर का आयोजन 4 फरवरी को को सुबह 8 बजे से शुरू होगा। बर्ड फेयर के प्रथम पॉइंट कायलाना रोड स्थित अखेराज तालाब, द्वितीय पॉइंट माचिया पार्क कायलाना रपट के आसपास विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों की अठखेलियों को देख सकेंगे।
तालाब में इन दिनों पेलिकन, ब्लेक विंड स्टील्ड, ग्रेटर कार्मोरेन्ट, कॉमन कूट, स्पॉट बिल, पाइड मैना, पर्पल स्वेमफेन, नार्दन पिन्टेल, पाइड किंग फिशर, पोचर्ड, कॉमन पोचर्ड, शॉवलर, व्हाइट ब्रस्टेड वाटर हेन, ग्रीन बी-ईटर, नाइट हेरोन, ग्रे हेरोन, पॉण्ड हेरोन व कॉम्ब डक प्रवास पर है। इस आयोजन में मुख्य सहयोगी लॉड्र्स कॉन्वेंट पब्लिक सीनियर सैकन्डरी स्कूल रातानाडा, यूथ अरण्य, वनविभाग, लेक विव, विश्नोई टाइगर्स वन्य एवं पर्यावरण संस्थान, गुरु जंभेश्वर वन्यजीव सेवा एवं पर्यावरण विकास संस्थान सहित पर्यावरण संरक्षण से जुड़े क्लब और विभिन्न शिक्षण संस्थाओं की सहभागिता रहेगी।
बर्ड फेयर में विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों के बारे में पक्षी विशेषज्ञ और पक्षी वैज्ञानिक विद्यार्थियों को महत्वूपूर्ण जानकारियां देंगे। फेयर के दौरान पक्षियों पर आधारित क्विज प्रतियोगिता होगी जिसमें विजेताओं को आकर्षक पुरस्कार दिए जाएंगे। यूथ अरण्य टीम के सदस्य नील कंठ बोड़ा,गौरव अग्रवाल, भरत जैन, सुरेन्द्र बोड़ा, दर्शन कल्ला, सारिका बिस्सा,अतुल कल्ला, मनीष सोलंकी, आज़ाद ओझा आदि प्रवासी पक्षियों से जुड़ी रोचक जानकारियां देंगे।
शीतकालीन गणना में 148 तरह के पक्षी आए नजर
शीतकाल के दौरान मारवाड़ आने वाले प्रवासी पक्षियों को इस साल भी जोधपुर काफी रास आया है। जोधपुर में शीतकालीन बर्ड सेन्सस में इस बार तेरह जल क्षेत्रों में गणना की गई जिसमें 148 प्रजाति के प्रवासी पक्षी नजर आए हैं। यह गणना वन विभाग वन्यजीव मंडल और शहर के पक्षी विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से अखेराजजी का तालाब,ओलवी, गुड़ा विश्नोइयां, बडली, सरदार समंद, रामासनी, बाल समंद, सूरसागर व खींचन आदि जगहों पर की। विशेषज्ञों का कहना है कि पक्षियों के समूह का पहुंचना मारवाड़ की जैव विविधता समृद्ध होने का संकेत है।
जलाशयों पर प्रचूर मात्रा में पानी और पक्षियों का प्रमुख आहार मछलियों का बहुतायात में होने के कारण सरदार समंद, खारडा के आसपास फ्लेमिंगों और पेलिकन सहित करीब 148 तरह के पक्षी पहुंचे हैं। हालांकि उम्मेद सागर, सूरसागर, बड़ली तालाब में पानी की कमी होने के कारण प्रवासी पक्षियों की संख्या नगण्य रही। शीतकालीन पक्षी गणना में पक्षी प्रवास विशेषज्ञ शरद पुरोहित की टीम व माचिया जैविक उद्यान के रेंजर अशोक कुमार सहित वनकर्मियों ने योगदान दिया।
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