गहलोत ने कसा शाह पर तंज, कहा जब मीडिया है तो घर-घर जाकर सीएए पर क्यंू समझाना पड़ रहा है

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जोधपुर. बर्फीली हवाओं के बीच शुक्रवार को सूर्यनगरी का सियासी पारा गर्माया रहा। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस को घेरा तो दो दिन की यात्रा पर गृह नगर आए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कभी आक्रमक तो कभी हंसी भरे अंदाज में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह पर तंज कसे।

गहलोत रावण चबूतरा मैदान में पश्चिमी राजस्थान उद्योग हस्तशिल्प उत्सव का उद़्घाटन करने के बाद आयोजित सभा में सीएए को लेकर आक्रामक अंदाज में नजर आए। सीएए को लेकर शाह की जन जागरण सभा के करीब तीन घंटे बाद गहलोत ने अपने अंदाज में शाह के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि देश में 1955 से आठ बार नागरिकता कानून में संशोधन हो चुका है। पहली बार हल्ला हुआ है। अब क्या जरूरत पड़ गई है, जो घर-घर समझाने जाना पड़ रहा है। देश में आग लगी है, लोग सडक़ों पर उतरे हुए हैं।

शरणार्थी प्रताडि़त होकर पचास साल से आ रहे हैं। ये इस बात को भुना रहे है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तो पहले भी लिखा था कि नागरिकता मिलनी चाहिए। मैं तो कह रहा हूं कि देश में सबको नागरिकता मिलनी चाहिए। हिन्दूसिंह सोढ़ा कई सालों से hindu पाक विस्थापितों को नागरिकता दिलाने के लिए लगे हुए हैं। भाजपा ने यहां भी दो टुकड़े कर दिए। गहलोत ने कहा कि सीएए से पहले आम सहमति बनाई जाती तो बवाल नहीं होता। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने नागरिकता संशोधन कानून को लेकर मुख्यमंत्रियों व सभी पार्टियों से बातचीत की थी।

गहलोत ने कहा कि हमारी शाह-मोदी से व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। उनकी जुगल जोड़ी सलामत रहे। कांग्रेस अपनी नीतियों व सिद्धांतों पर चलती है। महिला होते हुए भी इंदिरा गांधी ने आतंकवाद का सामना किया। मोदी-शाह इंदिरा गांधी से क्या मुकाबला करेंगे। लोकतंत्र का अधिकार ही कांग्रेस ने दिया है। मोदी को कांग्रेस का आभारी होना चाहिए। आजकल ये गांधी-पटेल को चुरा रहे है। पं. नेहरू 12 साल जेल में रहे। मोदी से पूछे कि उनका व भाजपा का क्या योगदान रहा।

आजादी से पहले इनकी जमात के लोग अंग्रेजों के लिए मुखबिरी करते थे। आज युवा पीढ़ी को सोशल मीडिया पर गुमराह कर रहे है। उन्होंने कहा कि रिफाइनरी में जानबूझकर भाजपा ने विलंब किया। हम पर सवाल किए कि 26 प्रतिशत की भागीदारी क्यों रखी। इनकी सरकार ने भी 26 प्रतिशत की भागीदारी रखी।



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