अविनाश केवलिया/जोधपुर. दिन में 15 बार से भी ज्यादा जहां कतारें लगती हैं। जिस फाटक पर सबसे ज्यादा यातायात का दबाव रहता है, वहां प्रस्तावित किया गया है शहर का पहला एच शेप ओवरब्रिज पिलर खड़े होने के बाद ठहर गया। पिछले करीब 6 माह से यहां कोई खास प्रगति नहीं है। दो साल में इस काम को पूरा करना था। लेकिन एक साल से अधिक समय हो गया है अब तक 20 प्रतिशत से ज्यादा काम नहीं पहुंचा है।
इस आधुनिक ओवरब्रिज का काम अटकने का कारण है डिफेंस की आपत्ति। जब डिजाइन पास हुआ और काम शुरू हुआ तब तक सब ठीक था। लेकिन जैसे ही पिलर खड़े हुए हैं और मुख्य सडक़ पर काम आने लगा तो सेना की ओर से इस पर आपत्ति की गई। इसे सुरक्षा के कारण खिलवाड़ बताया गया। इसके बाद एक प्रकार से इसका काम रोक दिया गया है। हालांकि सेना के उच्चाधिकारियों के साथ बात चलने का दावा किया जा रहा है, लेकिन अब तक करोड़ों रुपए का प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले इन सब बातों पर ध्यान नहीं दिया गया।
क्यों जरूरी है यह प्रोजेक्ट
यह ओवरब्रिज फाटक संख्या सी 168 पर बन रहा है। इस फाटक पर सबसे ज्यादा यातायात दबाव है। एक औसत के हिसाब से हर घंटे तक फाटक बंद होने से जाम लगता है। इसी यातायात दबाव को कम करने के लिए यह प्रोजेक्ट लाया गया था। एक ओर हाइवे सडक़ है इसी कारण इसी कारण दो समानान्तर सडक़ों पर इसे एच शेप बनाया जा रहा है।
फैक्ट फाइल
- 72 करोड़ है इस प्रोजेक्ट की पूरी लागत
- 2 साल में पूरा करना है इस प्रोजेक्ट को
- 20 प्रतिशत भी नहीं हुआ काम पूरा
- 15 माह से ज्यादा समय हुआ काम शुरू हुए
- 6 माह से नहीं कोई प्रगति
इनका कहना...
इसमें आधा काम होने के बाद सेना की आपत्ति आई थी। अब भारत सरकार के स्तर पर बातचीत के प्रयास चल रहे हैं। कोशिश करेंगे कि डिफेंस की यह आपत्ति हट जाए जिससे यह निर्माण पूरा हो सके।
- मेघराजसिंह रतनू, आयुक्त, जेडीए जोधपुर
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