नंदकिशोर सारस्वत/जोधपुर. सूर्य उपासना और पारम्परिक स्नेह और मधुरता का पर्व मकर संक्रांति हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। इस बार सूर्यदेव मकर राशि में 14 जनवरी मंगलवार को अद्र्धरात्रि बाद 2.06 बजे आने से मकर संक्रांति का स्नान, दान और पुण्यकाल 15 जनवरी बुधवार को सुबह शुरू होकर पूरे दिन सूर्यास्त तक रहेगा। संक्रांति पुण्यकाल में तीर्थ स्नान तथा गुड़ तिल-तेल से निर्मित वस्तुओं,घी व ऊनी वस्त्र के दान का महत्व बताया गया है। सूर्य मकर राशि में प्रवेश के साथ ही मळमास भी समाप्त हो जाएगा।
पं. ओमदत्त शंकर ने बताया कि संक्रांति पुण्यकाल में गायत्री मंत्र, पूजन, हवन तथा भगवान शिव के अभिषेक का विशेष महत्व माना गया है। बुधवार को ‘मळमास’ समाप्त होने पर एक माह से रुके हुए गृहप्रवेश, मुंडन संस्कार, यज्ञोपवीत, विवाह आदि शुभ कार्य के लिए भी मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। ज्योतिषियों के अनुसार संक्रांतिकाल में पंचामृत स्नान के बाद तर्पण का महत्व बताया गया है। मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में महिलाओं की ओर से पारम्परिक तेरह तरह की एक जैसी वस्तुएं ‘तेरूंडे’ की खरीदारी से सोमवार को बाजारों में दिन भर रौनक छाई रही। सूर्योपासना के पर्व पर जोधपुर में पकौड़े- गुळगुले और बाजरे का खीच बनाने की परम्परा का भी निर्वहन किया जाएगा। विवाहित पुत्रियों को तिल से बने व्यंजन भेजे जाएंगे।
पंजाबी समाज ने मनाई लोहड़ी
पंजाबी, सिख व सिंधी समाज जोधपुर की ओर से सोमवार को घरों में लोहड़ी पर्व धूमधाम से मनाया गया। पंजाबी समाज के नवविवाहितों में प्रथम लोहड़ी मनाने के प्रति खासा उत्साह नजर आया। समाज के लोगों के जिन घरों में नवजात शिशु की प्रथम लोहड़ी मनाई वहां रिश्तेदारों -परिचित मित्रों ने पहुंचकर बधाई व नवजात के दीर्घायु की प्रार्थना की।
संक्रांति के बाद 40 घड़ी तक रहता है पुण्यकाल
सूर्य जब मकर राशि में आता है तो उसे मकर संक्रांति कहते हैं। अगर यह संक्रमण यदि दिन में होता है तो दान श्राद्ध के लिए करीब 40 घड़ी तक पुण्यकाल माना गया है। यदि मकर संक्रांति रात्रि में हो तो तीर्थ स्नान, पूजन और श्राद्धादि कार्य दूसरे दिन सुबह ही करने चाहिए। इस बार मकर संक्रांतिकाल का संयोग मंगलवार रात्रि में हो रहा है। पुण्यकाल में काले तिलों से पितरों का तथा सफेद तिलों से देवताओं का तर्पण किया जाता है। इस पर्व हवन, तिलों का दान, वस्त्र, घृत, कंबल का दान अनंत फलदायक माना गया है। मकर संक्रांति पुण्यकाल में भारतीय महापुरुष भीष्म पितामह के स्वैच्छिक मृत्यु वरण के उपलक्ष्य में तर्पण किया जाता है।
दरिद्रता निवारण के लिए दान श्रेष्ठ
शिवरहस्य में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि जो व्यक्ति मकर संक्रांति पुण्यकाल में शिवाभिषेक के बाद जरूरतमंद को दान करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। मकर संक्रांति के पुण्यकाल महत्व में कहा गया है कि इस दिन व्रत करने व्रती को संध्या के समय शिव का घृताभिषेक व रुद्राभिषेक करते समय तिल चढ़ाने चाहिए। जरूरतमंदों को ऊनी वस्त्र, कम्बल और गायों को गुड़ की लापसी खिलाना चाहिए। मकर संक्रांति पुण्यकाल में संतान प्राप्ति के लिए दधिमंथन दान का विधान बताया गया है। यह दान केवल मकर संक्रांति के दिन ही किया जाता है। ब्रह्माण्ड पुराण में दधिमंथन दान का उल्लेख मिलता है। ज्योतिषियों के अनुसार अशुभ योग और कुंडली के दुर्योग निवारण के लिए मकर संक्रांति पुण्यकाल में शनिदेव को प्रकाश का दान का महत्व है। उदित सूर्य को जल का अग्र्य देना चाहिए।
इस बार मकर संक्रांति का वाहन गदर्भ
इस बार 14 जनवरी को अद्र्धरात्रि बाद मकर संक्रांति श्वेत वस्त्र पहने गदर्भ पर सवार होकर आएगी। उपवाहन मेष (भेड़) होगा और निवास माली का घर होगा। इससे देश में अच्छी फसल और उद्योगों को बढ़ावा मिलने का संकेत मिलता है। इस बार मकर संक्रांति से मौसम प्रतिकूल होगा और शस्त्र निर्माताओं की परेशानी बढ़ेगी।
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