बड़ा परिवर्तन: बिखरी टिड्डी बना रही क्लस्टर, बड़े क्लस्टर में अटैक

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जोधपुर. रेगिस्तानी टिड्डी अब सर्दी का भी सामना कर रही है। फसलों पर पाला पड़ जाने वाली सर्दी के बावजूद टिड्डी अभी तक राजस्थान में बनी हुई है। टिड्डी पर किए जा रहे पेस्टिसाइड छिडक़ाव के कारण बिखरे हुए टिड्डी दल फिर से बड़े दल यानी क्लस्टर में इक_ा होकर हमला कर रहे हैं जो इसके व्यवहार में बड़ा परिवर्तन का संकेत है। टिड्डी के लंबे समय तक बने रहने से अब विशेषज्ञ चिंतित है कि फरवरी तक आते-आते अगर टिड्डी रह गई तो यह स्प्रिंग बिल्डिंग भी भारत में कर देगी। राजस्थान में पिछले 26 साल में यह बड़ा टिड्डी हमला है, जिसमें अब तक 11 जिलों का 3.10 लाख हेक्टर क्षेत्र प्रभावित हुआ है। जोधपुर स्थित टिड्डी चेतावनी संगठन और कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर के प्रारंभिक शोध में यह सामने आया है कि टिड्डी में यह परिवर्तन जलवायु परिवर्तन का परिणाम है।


हवा की विपरित दिशा में भी उड़ रही टिड्डी
कृषि विवि जोधपुर के प्रोफेसर डॉ. एमएम सुंदरिया ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण टिड्डी के व्यवहार में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है। सामान्यत: टिड्डी हवा की दिशा की तरफ ही उड़ती है लेकिन इस बार कई टिड्डी दल हवा की दिशा के विपरित भी उड़ते देखे गए। तेज हवा और पेस्टीसाइड के कारण कुछ टिड्डी के मर जाने के बाद बची खुची टिड्डी पीछे से आ रहे झुण्डों के साथ जुडकऱ बड़ा क्लस्टर बनाते हुए देखी गई। इन बड़े क्लस्टर ने फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया।

अब तक 3.58 लाख हेक्टेयर में पेस्टीसाइड स्प्रे
एलडब्ल्यूओ ने मई 2019 से लेकर अब तक राजस्थान व गुजरात में टिड्डी के विरुद्ध 3.58 लाख हेक्टेयर में पेस्टीसाइड स्पे्र किया है, जिसमें राजस्थान का 90 फीसदी से अधिक हिस्सा शामिल है। मंगलवार को भी श्रीगंगानगर के घड़साना सहित आसपास के क्षेत्रों में नियंत्रण कार्यक्रम चलता रहा। श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में टिड्डी सरसों की फसल पर बैठ गई है।

कहां-कितना पेस्टीसाइड स्प्रे
जिले का नाम --------- हेक्टेयर में
जैसलमेर --------- 200000
बाड़मेर --------- 80000
बीकानेर ---------78000
श्रीगंगानगर ---------4900
जैसलमेर ---------1500
हनुमानगढ़ ---------800
नागौर ---------540
चूरू ---------500
पाली ---------430
सिरोही --------- 435
डूंगरपुर ---------50

जलवायु परिवर्तन ने टिड्डी को पाला
इस साल जलवायु में हुए बड़े परिवर्तन के कारण 26 साल बाद टिड्डी का बड़ा अटैक हुआ। इस साल 8 उष्णकटिंबधीय चक्रवात आए, जिनसे बरसात और नमी अधिक हो गई। हवा की दिशा बार-बार बदलती रही। वर्ष 2019 अब तक सर्वाधिक गर्म वर्षों में से एक रिकॉर्ड हुआ। राजस्थान में इस बार 10 साल बाद सरसों की फसल पर व्हाइट रस्ट रोग लगा है। जोधपुर में इस बार तापांतर और नमी भी सालों बाद अधिक देखी गई।
-डॉ. एमएम सुंदरिया, कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर

बॉर्डर के उस पार नहीं जा सकते
पाकिस्तानी बॉर्डर से रह रहकर टिड्डी दल आ रहे हैं और हम मार रहे हैं। बॉर्डर के उस पार नियंत्रण कार्यक्रम नहंीं चल रहा है। पाकिस्तान ईरान बॉर्डर और ब्लूचिस्तान में टिड्डी से जूझ रहा है। लाल सागर के दोनों तरफ बसे देशों और हॉर्न ऑफ अफ्रीका में भी यही स्थिति है। हमने टिड्डी का लगभग सफाया कर दिया है। बाड़मेर में टिड्डी थोड़ी अधिक है।
-डॉ. केएल गुर्जर, उप निदेशक, टिड्डी चेतावनी संगठन जोधपुर



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