जोधपुर.
केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधन संस्थान की ओर से तैयार एग्री-वोल्टेक मॉडल को सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी) अपनाने जा रहा है। इसके अलावा महाराष्ट्र के साथ ही अन्य प्रदेशों के रिन्यूएबल एनर्जी विभाग ने भी इस प्रोजेक्ट को धरातल पर लाने के लिए प्रयास शुरू किए हैं।
भविष्य में भूमि की कमी को देखते हुए किसान खेती से विमुख होकर सोलर का रास्ता अपना सकते हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए ही काजरी ने सोलर प्रोजेक्ट के साथ उसी जमीन पर खेती के उपयोग के लिए एग्री वोल्टेज प्रोजेक्ट विकसित किया गया था।
यह है खासियत
इस तकनीक में दो सोलर प्लेट के बीच करीब 3 से 9 मीटर की दूरी रखी जाती है। इसीमें कम ऊंचाई की फसलें ली जा सकेंगी।
वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी
सोलर की फोटो वोल्विक प्लेट के अंत में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया है। इसमें बारिश का पानी इन प्लेट से होकर पाइप लाइन के जरिये भूमिगत जल के रूप में संचित किया जा सकता है। साथ ही इन फोटो वोल्विक प्लेट की सफाई के लिए करीब 20 से 40 लीटर पानी का उपयोग प्रतिमाह होता है। यह पानी भी इस हार्वेस्टिंग सिस्टम से उपयोग में लिया जा सकेगा।
किसान को दोहरा लाभ
अपनी जमीन पर सोलर प्लांट लगाकर किसान स्थाई रूप से बिजली बिक्री से आय ले सकता है। साथ ही खेती से आय होगी व अलग। इसके अलावा राजस्थान जैसे प्रदेशों में कृषि कनेक्शन के लिए सात साल का इंतजार करना पड़ता है वहां सोलर बिजली का उपयोग किया जा सकता है।
सेकी ने दिखाई रुचि
काजरी के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. प्रियबत्रा संत्रा ने बताया कि सेकी की ओर से हालही में कुछ दिन पहले काजरी परिसर में इस मॉडल का निरीक्षण किया गया है। केन्द्र सरकार को इसकर रिपोर्ट भेजी जाएगी। केन्द्र सरकार की हरी झंडी मिलने के बाद नवीन एवं नवीनीकरण ऊर्जा मंत्रालय की ओर से इसे मॉडल के रूप में कृषि क्षेत्र में लागू किया जा सकता है। यह प्रणाली खर्चीली होने के कारण किसान इसका सीधा उपयोग नहीं कर पा रहे थे।
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