अरविंदसिंह राजपुरोहित/जोधपुर. तकनीक के बढ़ते प्रभाव का ही नतीजा है कि महज वन क्लिक में दुनिया भर की जानकारी हमें गैजेट्स के माध्यम से मिल जाती है। समय के इसी चक्र के साथ नॉलेज भी ऑनलाइन हो गया। भागदौड़ के बीच गैजेट्स में इंसान इतना उलझने लग गया है कि किताबों की तरफ झांकने की फुर्सत ही नहीं मिल रही है। खासतौर पर आज के यूथ एवं स्टूडेंट की ही बात की जाए तो हर वक्त गैजेट्स में ही व्यस्त नजर आते हैं, लेकिन पुस्तकों से जो सीखने को मिलता है वो और कहीं नहीं। हाल ही में पीएम नरेंद्र मोदी ने भी परीक्षा पर चर्चा के दौरान स्टूडेंट को ज्यादा समय गैजेट्स के साथ बिताने के बजाय पुस्तकों से जुडऩे की बात कही थी। पत्रिका प्लस ने भी पुस्तक प्रेमियों से इस पर चर्चा की।
सीएम ने गुलदस्तों के बजाय ली पुस्तकें
पुस्तकों की महत्वता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में हुए झारखंड विधानसभा के चुनावों के बाद शपथ ग्रहण से पूर्व सीएम हेमंत सोरेन ने दो ट्वीट किए थे। जिसमें बधाई देने आने वाले लोगों से गुलदस्तों के बजाय अच्छी पुस्तकें देने की अपील की थी। इसके बाद लोगों ने उन्हें कई सारी पुस्तकें भेंट की थी। वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर भी कई मौकों पर लोगों से पुस्तकें भेंट में देने की अपील भी कर चुके हैं। यदि आप भी कुछ नया सीखना चाहते हैं पुस्तक पढऩे का संकल्प अवश्य लें।
अकेलापन दूर करने में सहायक
यदि आप अकेलापन महसूस कर रहे हैं तो पुस्तकें जरुर पढ़ें। साहित्यकारों, पुस्तकप्रेमियों के अनुसार पुस्तक से जो ज्ञानवर्धक चीजें सीखने को मिलती है वह गैजेट्स में नहीं है। पुस्तक व्यक्ति को कभी अकेला महसूस नहीं होने देती। यदि आपके जीवन में दोस्त नहीं है तो बुक्स को अच्छा दोस्त माना जाता है। यह हमेशा कॅरियर में मदद करती है। चिंता, थकान को दूर करने के साथ ही मानसिक विकास में भी सहायक है। इससे हमेशा नया सीखने को मिलता है।
इनका कहना है-
पुस्तकों की संगति में एक व्यक्ति कभी अकेला महसूस नहीं कर सकता क्योंकि हर किताब के पीछे एक दोस्त को झांकते हुए देखा जा सकता है। जितना अधिक आप पढ़ते हैं, आपका दृष्टिकोण, विचार, कल्पनाएं बदल जाती है। पढऩे से ही समाज के नैतिक मूल्यों के बारे में जाना जा सकता है।
बिंदू टाक, लाइब्रेरियन
मेरे जीवन में अच्छी पुस्तकों का प्रभाव हमेशा से ही रहा है। बात चाहे संस्कृति की हो या सामाजिक व्यवहार सब कुछ पुस्तकों से ही सीखने को मिल रहा है। पुस्तक पढऩे के समय जो अनुभुति होती है उसे शब्दों में महसूस नहीं किया जा सकता है। हर स्टूडेंट को पुस्तक अवश्य पढऩी चाहिए।
गर्वित दाधीच, यूथ
पुस्तकें हमेशा से ही जरूरी रही है। महान लोगों की जीवनियां पढकऱ हमें न सिर्फ प्रेरणा मिलती है बल्कि कठिन समय से उबारने में भी सहायक होती है। युवाओं को कोर्स की किताबों से इतर भी पुस्तकों का अध्ययन अवश्य करना चाहिए। जिससे विभिन्न विषयों पर सीखने को मिल सकें।
नीतेश जोशी, यूथ
किताबें किसी भी विषय पर शोध उपरांत सटीक एवं उपयुक्त विश्वसनीय जानकारी देती है। इसे पढऩे से एकाग्रता, संयम, मनोभाव एवं मेमोरी स्ट्रॉंग होती है। इसमें किसी तरह का एडिशन नहीं होता, बल्कि गोल की तरफ झुकाव बढ़ता है। इंटरनेट एवं गैजेट्स की बजाय पुस्तकें पढऩा शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है।
डॉ. नवरत्न सुथार, सहायक आचार्य, मनोचिकित्सा विभाग एम्स
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