वहीं दूसरी तरफ खीचन में पक्षियों बीमार पक्षियों के मिलने का सिलसिला बदस्तूदर जारी है। गुरुवार को उपचाराधीन 2 पक्षियों की मौत हो गई तथा 4 और बीमार पक्षी मिले है।
जुलाई 2019 में लगाया था टैग-
पक्षी विशेषज्ञ डॉ. दाऊलाल बोहरा ने बताया कि खीचन में बीमार मिली कुरजां के पैर लगे टैग की पहचान के लिए लगातार प्रयास किए गए थे। इसके बाद इस पक्षी की पहचान हुई है। उन्होंने बताया कि कुरजां पर लगा टी-५१ टैग मंगोलिया के खुर्ख वेली में मंगोलिया व रूस के पक्षी वैज्ञानिकों की टीम के डॉ. निम्बियार बटबायार, डॉ. त्सेवेन, डॉ. ओलेग गोरोश्को, डॉ. एलेना इलेशेंको, डॉ. तुवशिंटोग्स सुखबातार द्वारा 27 जुलाई 2019 को लगाया गया था। वैज्ञानिकों ने बताया कि जब इस पक्षी को टैग किया गया था, तब यह पक्षी करीब २-३ माह का नवजात था। उन्होंने बताया कि इसके साथ करीब ४० पक्षियों को टैग किया गया था। पक्षियों पर टैगिंग का मुख्य उद्देश्य पक्षियों के प्रवसन मार्ग ,उनके प्रवसन स्थलों व प्रवास के दौरान खतरों का पता लगाना होता है।
2 कुरजां ने तोड़ा दम, 4 और मिले बीमार -
0वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. भागीरथ सोनी ने बताया कि रेस्क्यू सेंटर में उपचार के लिए भर्ती किए गए ४० पक्षियों में से दो कुरजां की मौत हो गई। आज सुबह उपचार व फॉलोअप के लिए रेस्क्यू सेंटर पहुंचे तो वहां दो कुरजां मृत मिली तथा अन्य कुछ की हालत नाजुक है। अन्य अधिकांश पक्षियों के स्वास्थ्य में सुधार देखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि परिस्थितियों को देखते हुए रेस्क्यू सेंटर में भर्ती बीमार पक्षियों की मॉनीटरिंग की जा रही है। पक्षी प्रेमी सेवाराम माली व मनीष कुमावत ने बताया कि आज खीचन के आस-पास इलाकों से सूचना मिलने पर ४ बीमार पक्षियों को रेस्क्यू सेंटर पहुंचाया गया। रेस्क्यू सेंटर के कर्मचारी मोहनराम, ओमसिंह, जोगाराम, भाई खान, गोविन्दसिंह बीमार पक्षियों की देखभाल कर रहे है। (कासं)-------------
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2QhHbK7
0 comments:
Post a Comment