जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन ने ई-कोर्ट की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने का निर्णय किया है। पेपरलेस वर्क को प्रोत्साहित करने के लिए अगले छह महीने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत याचिकाएं दायर करने से लेकर निर्णय तक सॉफ्ट-कॉपी में मुहैया करवाए जाएंगे।
हाईकोर्ट की फुल कोर्ट ने नवनिर्मित भवन के उद्घाटन के दिन राष्ट्रपति और भारत के प्रधान न्यायाधीश की ओर से की गई अपील पर अमल करते हुए सोमवार को यह बड़े निर्णय किए हैं।
हेरिटेज हाईकोर्ट भवन में सोमवार सुबह दोनों एडवोकेट्स एसोसिएशन की ओर से आयोजित विदाई समारोह में मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महांति ने फुलकोर्ट बैठक में लिए गए निर्णयों का ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राजस्थान हाईकोर्ट से अपेक्षा की थी कि सुप्रीम कोर्ट की तर्ज पर राज्य में भी अधिवक्ताओं व फरियादियों को हिन्दी में अनुवादित निर्णय उपलब्ध करवाए जाएं।
महांति ने बताया कि उनकी इस विषय में प्रधान न्यायाधीश से वार्ता हुई है। उन्होंने जनवरी तक फैसले हिन्दी में अनुवादित करने का सॉफ्टवेयर उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया है। इसके बाद अधिकतम फरवरी माह से प्राथमिकता से हिन्दी अनुवादित फैसले मिलने लगेंगे।
मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि सीजेआई ने प्री-लिटिगेशन मीडिएशन लागू करने पर जोर दिया था, जिसे हम अगले साल से लागू करने जा रहे हैं। बंटवारे तथा पारिवारिक मामलों में वाद दायर करने से पहले ही यदि मध्यस्थता से हल निकलता है तो इससे पारिवारिक शांति रहेगी। इसमें अधिवक्ताओं सहित जजेज को भी सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए। हालांकि, प्री-लिटिगेशन मीडिएशन ऐच्छिक होगा।
महांति ने बताया कि सभी कोर्ट को अब ई-कोर्ट में तब्दील किया जाएगा। इसके लिए छह महीने का लक्ष्य है। इसके तहत केसेज की फाइलिंग, जवाब दाखिल करना और निर्णय सभी ई-सर्विस आधारित होंगे। इससे काम पेपरलेस होगा और सभी पक्षों को सहूलियत होगी। समय और धन की भी बचत होगी।
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