जोधपुर. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (जयपुर) के सचिव अशोककुमार जैन ने बालिकाओं और बच्चों के अंगों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर हो रही तस्करी पर चिंता जताते हुए कहा कि इसे रोकने के लिए कानून के साथ प्रशासन की भी जवाबदारी बनती है। वे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में रविवार को बालश्रम और बाल तस्करी विषयक एक दिवसीय कार्यशाला को सम्बोधित कर रहे थे।
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष और सेशन न्यायाधीश नरसिंहदास व्यास ने कहा कि इस समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए सामाजिक स्तर पर जागरुकता लाने का प्रयास करना होगा। जिला एवं सेशन न्यायाधीश चंद्रकुमार सोनगरा ने बाल तस्करी के दुष्प्रभाव की जानकारी दी। यूनिसेफ के प्रतिनिधि जावेद अंसारी ने बताया कि बाल श्रम और बच्चों की तस्करी के मामले में राजस्थान का देश में तीसरा नंबर है।
कार्यशाला में किशोर न्याय बोर्ड के प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट ललित डाबी, जिला मजिस्ट्रेट सीमा कविया, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त निर्मला बिश्नोई ,मानव तस्करी यूनिट (पश्चिम) प्रभारी पुष्पेंद्र राडा, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की व्याख्याता डॉ निधि गुप्ता,सारथी स्वयंसेवी संस्थान की कृति भारती, किशोर न्याय बोर्ड के राजेंद्र सोनी और अधिवक्ता उपस्थित थे। कार्यशाला में बाल श्रम आधारित लघु फिल्म दिखाई गई। प्राधिकरण सचिव सिद्धेश्वर पुरी ने सभी का आभार जताया।
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