जोधपुर. सूर्य धनु राशि में प्रवेश के साथ ही 16 दिसम्बर को दोपहर 3.26 बजे से मळमास आरंभ हो जाएगा। एक माह तक सूर्य धनु राशि में रहने के दौरान सभी तरह की खरीदारी की जा सकती है लेकिन गृहप्रवेश, मुंडन संस्कार, यज्ञोपवीत, विवाह आदि सभी तरह के मांगलिक कार्य टाले जाएंगे। एक माह के बाद पुन: 15 जनवरी मकर संक्रांति के उपरांत ही विवाह आदि शुभ कार्यों की स्थिति बनेगी। तब तक कुंआरों को एक माह तक विवाह के लिए इंतजार करना पड़ेगा। पं. ओमदत्त शंकर ने बताया कि मळमास के दौरान गुरु का तारा अस्त रहेगा। यह तारा 15 दिसम्बर को अलसुबह 3.34 बजे से शुरू हो चुका है और 9 जनवरी को शाम 7.53 बजे तक रहेगा।
मळमास में यह कार्य हो सकते है
मळमास में सभी तरह के जीर्णोद्धार कार्य, मंदिरों का वार्षिक पाटोत्सव, पुराने में घर में प्रवेश, नवीन वस्त्र धारण कर सकते है। पं. ललित गुरु के अनुसार मांगलिक कार्यों की खरीदारी के लिए मळमास शुरू होने से पूर्व गुड़, मूंग,चावल, गेहूं, कुंकुम अथवा चांदी की खरीदारी करने के बाद पूरे मळमास में सभी तरह की वस्तुओं की खरीदारी की जा सकती है। नियमित दिनचर्या व गृहउपयोगी वस्तुओं की खरीदारी में किसी भी तरह की रूकावट नहीं है।
नववर्ष का प्रथम नौ रेखी सावा 15 जनवरी को
सूर्य धनु से मकर राशि में 14 जनवरी की रात्रि 2 बजकर 6 मिनट को प्रवेश होगा। मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को सुबह होगा। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश के साथ ही मळमास समापन होने से मांगलिक कार्यों का भी शुभारंभ हो जाएगा। पं. ओमदत्त शंकर ने बताया कि मकर संक्रांति का प्रथम नौ रेखी सावा 15 जनवरी 2020 को होगा। इसके बाद 29,30 व 31 जनवरी को भी नौ रेखी सावा होगा। इसी तरह फरवरी मास में 25 व 26 को भी 9 रेखी सावा है। होलाष्ठक 3 मार्च 2020 को लगने से पुन: 9 मार्च तक मांगलिक कार्य थम जाएंगे। पंडित हिमांशु द्विवेदी ने बताया कि शास्त्रीय मान्यता के अनुसार मलमास में शुभ कार्य कार्यों को सूर्य का बल नहीं मिलने के कारण वर्जित माने गए हैं। विवाह आदि शुभ कार्यों की स्थिति वापस नव वर्ष 2020 में 14 जनवरी के बाद ही बनेगी। मळमास में सभी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य निषेध रहेंगे परंतु धार्मिक अनुष्ठान, जप, तप, दान,भागवत, राम कथा श्रवण आदि पुण्य कार्य बहुतायत में होंगे।
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