अविनाश केवलिया/जोधपुर. इंदिरा गांधी नहर में मरम्मत व रखरखाव के कारण अगले वर्ष प्रस्तावित 70 दिन के क्लोजर का संकट अभी दूर नहीं हुआ है। राजस्थान और पंजाब के उच्चाधिकारियों के बीच इसी सप्ताह एक उच्चस्तरीय बैठक प्रस्तावित है। इसमें क्लोजर की अवधि कुछ कम करने पर मंथन हो सकता है। इससे पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी पंजाब के सीएम से कैप्टन अमरिंदर सिंह से इस मामले पर बात कर समाधान का आश्वासन दिया है। इस संकट के बीच एक राहत की बात यह है कि नहर से राजीव गांधी केनाल को मिलने वाली पानी की मात्रा में बढ़ोतरी हुई है। अब प्रतिदिन जलाशयों के वाटर लेवल में आंशिक बढ़ोतरी हो रही है।
40 दिन है हमारी क्षमता
केनाल और प्रमुख जलाशयों में पानी को स्टोर कर करीब 40 दिन तक जोधपुर शहर व आस-पास के गांवों को पानी पिलाया जा सकता है। 70 दिन तक का स्टोरेज करने के लिए केनाल का तीसरा चरण ही विकल्प है। लेकिन इस चरण को पूरा होने में करीब 5 से 6 वर्ष का समय लग सकता है। ऐसे में इस बार यदि 70 दिन तक क्लोजर टाल भी दिया जाता है तो अगले वर्ष फिर से यह संकट होगा। ऐसे में अब अस्थाई विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है।
जोखिम की हो रही गणना
वर्तमान केनाल की ऊंचाई बढ़ाकर इसमें 10 से 15 दिन का अतिरिक्त पानी संचित करने पर भी मंथन हो रहा है। बीते दिनों मुख्यमंत्री के जोधपुर दौरे पर रहते हुए समीक्षा बैठक में इस पर मंथन हुआ है। इस पर पीएचइडी की ओर से एक सर्वे किया जा रहा है। जिसमें केनाल की दीवार की ऊंचाई बढ़ाने पर जोखिम की गणना भी की जा रही है।
अभी यह है जलाशयों का गणित
- 251 एमसीएफटी पानी है कायलाना-तख्तसागर जलाशयों में
- 100 एमसीएफटी डेड स्टोरेज में रहता है
- 350 एमसीएफटी करीब कुल क्षमता दोनों जलाशयों की
- 240 क्यूसेक पानी मिल रहा था कुछ दिन पहले
- 2 एमसीएफटी पानी प्रतिदिन जलाशयों का टूट रहा था
- 260 क्यूसेक से अधिक पानी इन दिनों मिल रहा जोधपुर को
- अब हो रही जलाशयों में बचत
आज नहीं आएगा पूरे शहर में पानी
अगले वर्ष की नहरबंदी को लेकर जलाशयों में वाटर लेवल बढ़ाने के कारण 23 दिसंबर को पूरे शहर में जलापूर्ति नहीं होगी। हर पखवाड़े होने वाले 24 घंटे के क्लोजर के तहत अलग-अलग फिल्टर हाउस अलग-अलग समय पर बंद होंगे। इससे 23 दिसंबर को होने वाली जलापूर्ति 24 को और 24 को जिन मोहल्लों में जलापूर्ति होनी है वह 25 तारीख को होगी।
इनका कहना है...
70 दिन के क्लोजर पर अभी अंतिम निर्णय एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद ही होगा। केनाल की ऊंचाई बढ़ाने पर चर्चा हुई थी लेकिन इसमें कुछ रिस्क भी है। पूरी तरह से सर्वे करने के बाद ही इस पर कोई निर्णय हो सकेगा।
- दिनेश कुमार पेडीवाल, अधीक्षण अभियंता, पीएचइडी जोधपुर
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