5 करोड़ की आय वाले माचिया पार्क में नहीं है पर्याप्त मेडिकल स्टाफ, वन्यजीवों के मरने पर नहीं मिल पाती यह सुविधा

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नंदकिशोर सारस्वत/जोधपुर. देश विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बन चुका माचिया जैविक उद्यान से राज्य सरकार को हर साल करोड़ों का राजस्व प्राप्त हो रहा लेकिन यहां आने वाले पर्यटकों और पिंजरों में रहने वाले वन्यजीव चार साल बाद भी जरूरी सुविधाओं से महरूम हैं। वर्ष 2016 में 20 जनवरी को कायलाना जलाशय के पास करीब 41 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 32.43 करोड़ की लागत से निर्मित माचिया जैविक उद्यान के उद्घाटन के बाद करीब 14 लाख देशी विदेशी दर्शक देखने पहुंचे हैं।

दर्शकों में शामिल छात्रों, कैमरों व डाक्युमेन्ट्री तथा कैफेटेरिया व पार्र्किंग आदि से राज्य सरकार को 5 करोड़ 9 लाख 13 हजार की आय हो चुकी है। हर साल लगातार राजस्व बढऩे के बावजूद भी जोधपुर के आम पर्यटकों के लिए उद्यान तक पहुंचने के लिए परिवहन की सुविधाएं तक मुहैया नहीं हो पाई है। जिन पर्यटकों की ओर से वन्यजीवों के देखने से सरकार को आय होती है उन वन्यजीवों की नियमित स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, बीमारी रोकथाम के लिए अभी तक स्थाई चिकित्सक व सहायक चिकित्सक स्टाफ तक नहीं है।

जंतुआलय के वन्यजीव की मौत के बाद दाह संस्कार शव निस्तारण के लिए कारकस प्लांट तक नहीं लग पाया है। बॉयलोजिकल पार्क निर्माण परियोजना में जापान इंटरनेशनल कॉर्पाेरेशन एजेन्सी ‘जाईका’ के सहयोग से 24.09 करोड़ व राजस्थान सरकार से 4.20 तथा तेरहवें वित्त आयोग से 4.14 करोड़ की राशि दी गई।

माचिया में वर्षवार पर्यटक संख्या
2016-1,24, 568
2017-3,24,900
2018-3,36,958
2019-3,62,447

शिफ्ट हुए पक्षियों का जीवन खतरे में
करीब आठ दशक तक उम्मेद उद्यान में संचालित जंतुआलय के करीब 500 से अधिक पक्षियों को दो साल पहले बिना किसी परम्परागत आशियाने की तैयारी किए बिना माचिया जैविक उद्यान में शिफ्ट किया गया। इसके बाद वन विभाग ने माचिया पार्क को विकसित एवं समृद्ध करने के लिए फेज-2 में 16 करोड़ का प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजा था लेकिन परियोजना को आज तक मंजूरी नहीं मिल पाई। परियोजना के तहत पुराने जंतुआलय के पक्षियों के लिए बर्ड सेक्शन के लिए विशाल पिंजरों का निर्माण कार्य शामिल था।

सरकार की मंजूरी नहीं मिलने का खमियाजा जंतुआलय के नाम मात्र जिंदा बचे पक्षियों को अस्थाई आशियाना में रहकर भुगतना पड़ रहा है। उम्मेद उद्यान स्थित जंतुआलय में राज्य के प्रथम सर्वश्रेष्ठ पक्षी कक्ष रहे (वाक इन एवियरी) के पक्षियों में राजहंस, पहाड़ी तोते, तीतर, कॉमन कूट, पेलिकन्स सहित 350 लव बड्र्स में अधिकांश की तो मौत तक हो चुकी है। पुराने जंतुआलय के 150 से अधिक चीतलों को कोटा मुकंदरा हिल्स में छोड़ा जा चुका है।

ये हैं टॉप 10 असुविधाएं
1. मनोरंजन की सुविधाएं नहीं, पिंजरों में घास और गढ्ढे
2. सर्विस रोड का निर्माण तक नहीं
3. वन्यजीवों के पिंजरों के बाहर व अंदर बारिश से बही मिट्टी के कारण गढ्ढे
4. वन्यजीव चिकित्सालय में मेडिकल स्टाफ ही नहीं
5. केयर टेकर और केज क्लीनर के पद रिक्त
6. स्टाफ को संक्रमण से बचाव के लिए उपकरण और सामग्री नहीं
7. बारिश के कारण पिंजरों में खरपतवार हटाने का कार्य
8. प्रकृति निर्वचन केन्द्र के चित्र धुंधले हो चुके
9. पर्यटकों के लिए मनोरंजन और बैठने के लिए सुविधाओं में कमी
10. जैविक उद्यान तक आने जाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से परिवहन व्यवस्था नहीं

अलग से बर्ड सेक्शन के लिए प्रस्ताव तैयार
माचिया उद्यान में बर्ड सेक्शन के लिए डीपीआर तैयार है। इसके लिए सीएलडब्ल्यूएल के माध्यम से केन्द्रीय चिडिय़ाघर प्राधिकरण को भेजा जाएगा। खरपतवार हटाने व दर्शकों की सुविधा में बढ़ोतरी के लिए उपवन संरक्षक व माचिया उद्यान तक शहरी परिवहन सुविधाओं को कलक्टर व परिहवन अधिकारी को पत्र लिखा जाएगा।
- अशोकाराम पंवार, क्षेत्रीय वन अधिकारी, माचिया जैविक उद्यान



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