फिर जगी कचरे से बिजली बनाने की उम्मीद, सीएम गहलोत जोधपुर-जयपुर में प्रोजेक्ट शुरू करवाने में दिखा रहे रुचि

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अविनाश केवलिया/जोधपुर. प्रदेश के दोनों बड़े शहरों में कचरे के बीच उम्मीदें दबी र्हं। जिस कचरे को नकारा समझ कर अब तक सिर्फ डम्पिंग यार्ड भरने के काम में लिया जाता है, उससे बिजली बनाने की आस पांच साल पहले जगी थी। प्रदेश में पहली बार इन दो शहरों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में काम होना था। लेकिन अब तक यह उम्मीदें पूरी नहीं हुई। अब स्वच्छता सर्वे 2020 की प्रक्रिया शुरू होने से पहले एक बार फिर राज्य सरकार ने इसके एमओयू के लिए कमर कसी है। नया प्रोजेक्ट भी संबंधित फर्म से लिया गया है। राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम के साथ दरें तय होने की उम्मीद एक बार फिर जगी है।

प्रदेश के दो बड़े शहरों जयपुर और जोधपुर में कचरे से बिजली बनाने (वेस्ट टू एनर्जी) के प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाने के प्रयास पिछले पांच साल में नाकाफी साबित हुए हैं। करीब तीन माह पहले हुई मुख्य सचिव स्तर की बैठक में भी कोई निर्णय नहीं निकला। इस प्रोजेक्ट के शुरू नहीं होने से दोनों शहरों की स्वच्छता रैकिंग भी प्रभावित हो रही थी।

अब खुद मुख्यमंत्री ने इसके प्रति रुचि दिखाते हुए प्रोजेक्ट में आ रही दिक्कतों को जल्द दूर करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में जिस कंपनी को इस प्रोजेक्ट के लिए फाइनल किया गया है उससे संशोधित दरों का नया प्रपोजल भी लिया गया है। इन शहरों में बनने वाली बिजली को राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम खरीदेगा। दरों को लेकर टकराव पिछले लम्बे समय से चल रहा है।

क्या है प्रोजेक्ट
जयपुर व जोधपुर शहरों से जो कचरा संग्रहित किया जा रहा है, उसको स्टीम कर बिजली बनाने का प्रोजेक्ट पांच साल पहले लांच किया गया था। इससे कचरा निस्तारण तो होगा ही साथ ही निगम को आय भी होगी। स्वच्छता सर्वेक्षण में सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट के नम्बर भी इसी प्रोजेक्ट के एमओयू होने के बाद मिलेंगे।

क्यों जरूरी है
दोनों शहरों से 2 हजार टन से अधिक कचरा प्रतिदिन एकत्रित होता है। इनके निस्तारण के तौर पर सिर्फ डम्पिंग यार्ड पर इनको डाला जा रहा है। इससे पृथ्वी प्रदूषण का खतरा बना हुआ है।

क्या है समस्या
इस प्रोजेक्ट में बनने वाली बिजली को राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम खरीदेगा। लेकिन संबंधित कंपनी व निगम के बीच बिजली खरीद की दरों को लेकर टकराव चल रहा है। करीब 6 मेगावाट से ज्यादा बिजली दोनों शहर के प्लांट बनाएंगे।

जोधपुर में कुछ ऐसे हैं हालात

- 650 टन कचरा करीब प्रतिदिन जोधपुर शहर में जमा होता है।
- 400 टन कचरा वेस्ट टू एनर्जी प्रोजेक्ट लिए लेना तय हुआ।
- 3 मेगावाट बिजली बनना प्रस्तावित है।
- 50 बीघा जमीन दी गई है जोधपुर में इस फर्म को।
- 15 लाख रुपए की आय प्लांट शुरू होने के बाद हो सकती है नगर निगम जोधपुर को।

अमरीका से एडवांस है तकनीक
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट तकनीक में हमारा देश अमरीका से एडवांस है। अभी हाल में ही सिटी एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत जोधपुर नगर निगम के दो अधिकारियों ने अमरीकी शहरों का दौरा किया। वहां अब भी सॉलिड वेस्ट डम्पिंग कर ही निस्तारित किया जाता है। हमारे प्रदेश में पहली बार वेस्ट टू एनर्जी तकनीक को लाया जाएगा। भारत के अन्य प्रदेशों में यह तकनीक चल रही है।

इनका कहना है...
इस प्रोजेक्ट को अब जल्द स्वच्छता सर्वे से पहले शुरू करना प्रस्तावित है। नया प्रपोजल संबंधित कंपनी ने दिया है। ऐसे में जल्द जयपुर स्तर पर ही दरें हो सकती है।
- सुरेश कुमार ओला, आयुक्त, नगर निगम जोधपुर

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