दरअसल कुरजां कल शाम को यहां तालाबों पर विचरण के बाद अपने-अपने समूहों में रात्रि विश्राम के लिए नमक उत्पादन क्षेत्र में चली गई थी। ये पक्षी अगले दिन खीचन वापसी के दौरान सुबह नजर आने वाले इस खतरनाक दृश्य से पूरी तरह अनजान थे। जब ये पक्षी आज सुबह 6.46 बजे खीचन पंहुचे तो 8.30 बजे तक चुग्गाघर में दाना लेने नहीं पंहुचे। इसके कुछ समय बाद ही पता चला कि गांव में जगह-जगह पर कुरजां के शव मिले है। कुरजां पक्षियों की दिनचर्या इस हादसे के बाद आज पुरी तरह से गड़बड़ाई हुई नजर आई। फिर दोपहर में तालाबों पर काफी नजर आए। सुबह से करीब १२ बजे तक ये पक्षी आकाश उड़ते नजर आए और कई तो इनके समूह ज्यादा ऊंचाई तक भी चले गए। पक्षी विशेषज्ञों का कहना है कि इस हादसे के कारण पक्षी असहज महसूस करने के चलते इस तरह का व्यवहार प्रदर्शित करते है।
बेरंग लौटे पर्यटक-
सुबह पक्षियों के विश्राम स्थलों से खीचन आने और पक्षी चुग्गाधर में इनकी अठखेलियां पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र रहती है, लेकिन आज यहां पक्षियों के चुग्गाघर में नहीं आने के कारण यहां आए पर्यटकों को बेरंग ही लौटना पड़ा।
खीचन में कब बनेगा रेस्क्यू सेंटर-
खीचन में कुरजां को त्वरित उपचार देने के लिए कुछ साल पूर्व रेस्क्यू सेंटर के लिए वन विभाग द्वारा बजट स्वीकृत किया गया था, लेकिन उस समय भूमि की उपलब्धता नहीं होने के कारण बजट लैप्स हो गया था। इसके बाद जमीन तो मिल गई, लेकिन अब तक रेस्क्यू सेंटर के लिए वापस बजट नहीं मिल पाया है। (कासं)
इनका कहना है-
* ये पक्षी सामाजिक है। इसके साथ ही ये समूह रहते है, समूह में खाना लेते है। इसकी टेगिंग से भी पुष्टि हुई है। एक साथ इतने पक्षियों की मौत से साथी पक्षी डर गए है। आज पक्षियों का चुग्गा नहीं लेना हादसे के बाद इनकी असहजता को दर्शाता है। इनका यह व्यवहार सामान्य होने में १-२ दिन लग सकते है।
डॉ. दाऊलाल बोहरा, पक्षी विशेषज्ञ
* खीचन में आज एक साथ ज्यादा पक्षियों की मौत होना पक्षियों के लिए विचलित करने वाली बात है। सामान्यतया देखा गया है कि पक्षी एक बार पक्षियों को खतरा महसूस होने पर कुछ समय के लिए पक्षियों का विचरण गड़बड़ा जाता है।
डॉ. गोपी सुन्दर, कार्यक्रम निदेशक, सारस स्कैप, इंटरनेशनल क्रैन फाउण्डेशन
* आज 37 कुरजां की मौत के बाद चुग्गाघर सूना ही रहा और पर्यटकों को भी इंतजार के बाद लौटना पड़ा। खीचन में कुरजां को तत्काल उपचार देने के लिए बर्ड रेक्स्यू सेंटर की आवश्यकता है।
सेवाराम माली, पक्षी प्रेमी, खीचन (फलोदी)
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