अरविंदसिंह राजपुरोहित/जोधपुर. एक समय था जब अपने पसंद के लेखकों की पुस्तक को पढऩे के दीवाने बाजार में चक्कर लगाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। इंटरनेट व डिजिटाइजेशन के दौर में महज वन क्लिक पर ही फेवरिट पर्सनैलिटी की ऑटोबायोग्राफी हो या फिर कोई नावेल सब एक क्लिक पर मिल जाता है। इतना ही नहीं टेक्निक के बढ़ते प्रभाव से नए दौर के लेखक भी हाइटेक हो गए। कई सारे एप्स, ऑनलाइन साइट्स पर नए दौर के लेखक ऑनलाइन ही बुक्स राइटिंग कर रहे हैं। जिन्हें पढऩे वालों की संख्या भी दिनों-दिन बढ़ रही है। डिजिटाइजेशन के इसी दौर में नेशनल ऑथर डे पर पेश है स्टोरी-
बदल गया स्वरुप हिंदी लेखन का बढ़ रहा दायरा
वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. सत्यनारायण के अनुसार बदलती तकनीक में लेखन का स्वरूप भी बदल रहा है। टीवी, मोबाइल के चलते समाज में जो परिर्वतन आया है उसका प्रभाव भी कहानी, साहित्य पर पड़ा है। इसी बदलते परिवेश का संबंध भी अब कहानियों, साहित्य में लिखा जा रहा है। ऑथर आशीष के अनुसार डिजिटल ने हिंदी के बाजार का विस्तार किया है, नए पाठकों को जोड़ा है। अब कहानियां सिर्फ पढ़ी ही नहीं जाती, सुनी भी जा रही हैं।
ऑनलाइन में ऑप्शन्स, लेकिन जुड़ाव नहीं
बुक लवर सचिन ने बताया कि बिजी लाइफ स्टाइल में हर किसी के पास इतना समय नहीं कि वो मार्केट तक जाए और पसंद की बुक ले आए। इधर इसी को ध्यान में रखते हुए बीते कुछ सालों में ई बुक्स का ट्रेंड बढ़ गया। इसके अलावा कई एप्स, साइट्स पर पसंद के लेखक की बुक्स कहीं भी रहकर पढ़ सकते हैं। ऑफलाइन जहां सलेक्टेड बुक्स ही मिल पाती है वहीं ऑनलाइन की दुनिया में विश्व के किसी भी कोने में बैठकर किसी भी ऑथर की बुक रीड कर सकते हैं।
इनका कहना है-
बेशक टेक्नोलॉजी का फायदा मिल रहा है, लेकिन जो जुड़ाव ऑफलाइन बुक रीडिंग में है वो ऑनलाइन नहीं। कागज के साथ आत्मीय लगाव पढ़ते समय महसूस होता। साथ ही हिंदी लेखन व रीडर बढ़ रहे हैं। बल्कि अब तो कई अन्य भाषाओं के लेखक भी चाहते हैं कि उनकी पुस्तक का अनुवाद हिंदी में हो।
प्रो. सत्यनारायण, वरिष्ठ साहित्यकार
डिजिटल ने पढऩे लिखने के तरीके को बदल दिया है। अब कहानियां किताबों से बाहर निकल कर मोबाइल और टैब के माध्यम से पहुंच रही हैं। आज के समय में सोशल मीडिया पर लिखने का ट्रैंड बढ़ा है। नए लेखकों ने इसके माध्यम से पाठक तक पहचान बनाई है।
आशीष चौधरी, युवा लेखक
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/321zfiR
0 comments:
Post a Comment