जोधपुर. कार्तिक शुक्ला एकादशी शुक्रवार को देव जागेंगे। देव दिवाली के रूप में देवउठनी एकादशी पर भगवान शालीग्राम व माता तुलसी का विवाह सम्पन्न होगा। इसके साथ ही शादी-विवाह आदि मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी। दीपावली के बाद तुलसी विवाह या देवउठनी एकादशी पर बाजार में भी रौनक लौटेगी। अक्षय ज्योतिष अनुसंधान केन्द्र के अध्यक्ष पं कमलेशकुमार दवे के अनुसार देवउठनी एकादशी का विशेष महत्व है। इस दिन अबूझ मुहुर्त होने से सावों सहित मांगलिक कार्यों की धूम रहेगी। तुलसी चौरा पर गन्ने का विशेष मण्डप बनाकर दम्पति भगवान शालीग्राम व माता तुलसी की मूर्तियां लेकर सात फेरे लेंगे। आतिशबाजी के बीच विवाह कार्यक्रम सम्पन्न होगा। घर-घर पटाखें छोड़े जाएंगे।
शादी-विवाह के मुहुर्त शुरू
पं दवे ने बताया कि देवउठनी एकादशी तुलसी विवाह के रूप में मनाई जाएगी। इस दिन विवाह सहित सभी शुभ मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। नवरम्बर माह में तुलसी विवाह के बाद 19, 20, 21, 22, 23, 28, 30 नवम्बर तक विवाह के शुभ मुहूर्त है।
दिसम्बर में केवल 11 व 12 दिसम्बर शुभ मुहुर्त है।
जनवरी- 15,16,18, 20, 29, 30 व 31 जनवरी।
फरवरी - 4, 9, 10, 12, 16, 25, 26, 27 फरवरी।
मार्च- 9, 10, 11 मार्च।
फिर 14 मार्च से सूर्य मीन राशि में प्रवेश कर 15 अप्रेल तक रहेगा। इस बीच शादी-विवाह व शुभ कार्यों के मुहूर्त नहीं रहेंगे।
16 से मल मास
16 दिसम्बर से मल मास शुरू होगा। इस दिन सूर्य धनु राशि में आएगा और 14 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश करेगा।
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