जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने बालोतरा के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को बाड़मेर जिले के पचपदरा पुलिस थाने में गत 5 अक्टूबर को आरटीआइ कार्यकर्ताजगदीश गोलिया (42) की मृत्यु के मामले की न्यायिक जांच चार सप्ताह में पूरी कर रिपोर्ट बंद लिफाफे में जनवरी के प्रथम सप्ताह में पेश करने को कहा है।
पुलिस अनुसंधान पर सवाल उठाते हुए सीबीआइ मृतक की पत्नी बिरजू चौधरी ने 6 नवंबर को मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महांति की अगुवाई वाली खंडपीठ के समक्ष प्रार्थना पत्र व अन्य दस्तावेज पेश कर इस मामले में थाना प्रभारी सहित समस्त पुलिस थाना स्टाफ के खिलाफ हत्या के आरोप में दर्ज कराई गई एफआइआर की सीबीआई से जांच के आदेश देने का आग्रह किया था।
मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महांति और न्यायाधीश डॉ. पुष्पेंद्रसिंह भाटी की खंडपीठ में बुधवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि जगदीश को पुलिस ने हिरासत में लेते समय चिकित्सकीय जांच के दौरान डॉक्टर ने एक्सरे व अन्य जांचों के लिए कहा था, लेकिन पुलिस ने तब ऐसी जांचें नहीं करवाई। अतिरिक्त महाधिवक्ता मनीष व्यास ने कोर्ट को बताया कि कुछ अतिरिक्त दस्तावेज उन्हें याची के अधिवक्ता ने हाल ही उपलब्ध करवाए हैं, जिस पर सरकार का प्रत्युत्तर पेश करने के लिए उन्होंने समय मांगा। व्यास ने कोर्ट को बताया कि हिरासत में मौत के मामले की न्यायिक जांच बालोतरा के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कर रहे हैं। मृृतक के पोस्टमार्टम के बाद विसरा संरक्षित किया गया था, जिसे जांच के लिए एफएसएल लैब भेजा गया है, लेकिन जांच रिपोर्ट आनी बाकी है। खंडपीठ ने एफएसएल लैब को विसरा की जांच दो सप्ताह में पूरी कर रिपोर्ट अनुसंधान अधिकारी के माध्यम से कोर्ट के समक्ष पेश करने को कहा है। मामले की सुनवाई जनवरी के दूसरे सप्ताह में नियत की गई है।
गौरतलब है कि मृतक की पत्नी ने कोर्ट में दस्तावेज पेश कर कहा था कि उसके पति ने बाड़मेर जिले में विभिन्न पुलिस स्टेशन सहित एसपी ऑफिस में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत 93 आवेदन दिए थे।
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