जोधपुर.
मूंगफली के छिलके का रंग समर्थन मूल्य पर खरीद में बाधा नहीं बनेगा। दाने की क्वालिटी सही होगी तो खरीद केंद्र मूंगफली की खरीद कर सकेंगे।
सरकार ने 7 नवम्बर से समर्थन मूल्य पर मूंगफली की खरीद शुरू की थी। लेकिन खरीद प्रक्रिया की शुरुआत में ही जोधपुर जिले में 9 केन्द्रों पर मूंगफली की खरीद प्रक्रिया के प्रावधानों की जगह अघोषित नियमों का हवाला देते हुए किसानों को परेशान किया जा रहा था। कृषि अधिकारियों ने नैफेड के अधिकारियों से बात कर किसानों की समस्या का समाधान कराया।
40 प्रतिशत फसल खराब हो गई
जिले में करीब 1 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में मूंगफ ली की फ सल बोई गई थी। किसानों ने मूंगफली की खुदाई कर सूखने को छोड़ दी। लेकिन बेमौसम बरसात से करीब 40 प्रतिशत फ सल खराब हो गई। बची मूंगफ ली के छिलके का रंग काला पड़ गया था। ऐसी मूंगफ ली की खरीद में क्रय-विक्रय सहकारी समितियां आनाकानी कर रही थी। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान की आशंका सताने लगी थी।
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रकबा लाख हैक्टेयर में, अनुमानित व वास्तविक उत्पादन लाख मिट्रिक टन
फ सल---- बुवाई रकबा--- अनु.उत्पादन-- वास्तविक उत्पादन
मूंगफ ली--- 1.00--- 2.65---- 1.50
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‘एडीएम जोधपुर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय खरीद कमेटी की बैठक में नैफेड के नियमों पर चर्चा की गई। इसके बाद तय किया कि छिलके के रंग के आधार पर मूंगफली रिजेक्ट करने का प्रावधान नहीं है। दाने की गुणवत्ता देखकर ही खरीद की जाए।
वीएस सोलंकी,
उप निदेशक, कृषि विस्तार
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‘किसानों ने नैफेड के मापदंडों के अनुसार मूंगफ ली का दाना सही होने पर खरीद सुनिश्चित करने की मांग की थी। कमेटी ने सहकारी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। अब किसानो से बेरोकटोक मूंगफ ली खरीद हो सकेगी।
तुलछाराम सिंवर, आंदोलन व प्रचार प्रमुख
भारतीय किसान संघ, जोधपुर प्रांत
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