अविनाश केवलिया/जोधपुर. हमारा शहर जोधपुर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल नहीं है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक साल पहले एक सैन्य कार्यक्रम में जोधपुर आए थे तो उस समय अशोक गहलोत ने एक ट्वीट कर जोधपुर शहर को स्मार्ट सिटी का दर्जा देने की मांग की थी। उस समय प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। विधानसभा चुनाव के बाद गहलोत तीसरी बार मुख्यमंत्री बने हैं। स्मार्ट सिटी की तर्ज पर विकास करवाना अब उनकी जिम्मेदारी है। स्मार्ट सिटी का तमगा देना तो केन्द्र सरकार के हाथ है, लेकिन सिटी को विकास कार्यों के जरिये स्मार्ट बनाने का काम तो राज्य सरकार कर ही सकती है।
इस समय प्रदेश के चार शहर स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल हैं। जयपुर, उदयपुर, अजमेर और कोटा के बीच रेस हो रही है। जोधपुर को बजट में जिन विकास कार्यों के सपने दिखाए गए थे, यदि वह प्रोजेक्ट भी धरातल पर उतरें तो एक स्मार्ट सिटी में होने वाले कार्यों की लिमिट को भी हम पार कर सकते हैं। लेकिन खास बात यह है कि इतनी राशि खर्च करने के बाद भी कई समस्याएं हमें स्मार्ट नहीं बनने देगी।
जोधपुर: ये प्रमुख कार्य हों तो हम भी बन सकते स्मार्ट सिटी
1. ग्रीन सिटी - इस कार्य में हम काफी पीछे हैं। उम्मेद उद्यान का विकास का खाका जरूर तैयार हुआ है। इसके बाद न्यायालय की सख्ती के बाद सरकार मंडोर उद्यान विकास पर काम करने को मजबूर हुई। लेकिन इसके बाद ग्रीन एरिया डवलपमेंट में हम काफी पीछे हैं।
2. पब्लिक सैफ्टी - कई प्रमुख चौराहों और रास्तों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। लेकिन अब भी शहर की हर सडक़ सुरक्षित नहीं है। चार दीवारी के भीतर बसे शहर में भी इस मॉनिटरिंग की आवश्यकता है। चेन स्नेचिंग व लूट जैसी घटनाएं नहीं रुक रही है।
3. एजुकेशन - स्मार्ट क्लासेस प्रोजेक्ट पर काम होना है। कुछ स्कूलों में जरूर पायलट प्रोजेक्ट से काम हुआ। लेकिन पूरे एजुकेशन सिस्टम को अपग्रेड करने में अभी काम करने की जरूरत है।
4. ट्रांसपोर्ट- इस क्षेत्र में जोधपुर में सबसे ज्यादा काम करने की जरूरत है। वर्तमान में जोधपुर में यातायात जाम की समस्या सबसे बड़ी है। साथ ही वायु प्रदूषण भी बड़ी समस्या बन कर उभरा है। यदि ई-रिक्शा को बढ़ावा दिया जाए तो काफी हद तक समाधान हो सकता है।
5. पावर जनरेशन- वैसे तो जोधपुर जिला सोलर पावर जनरेशन का गढ़ है। लेकिन शहर में सोलर जनरेशन सभी सरकारी भवनों पर नहीं है। हालांकि नगर निगम ने अपने तीनों ट्रीटमेंट प्लांट में यह सिस्टम लगाने की पहल की है जिससे रोड लाइट का खर्च भी इसी से निकाला जा सके।
केस स्टडी : उदयपुर
प्रदेश की चार स्मार्ट सिटी में शामिल उदयपुर को केस स्टडी के रूप में शामिल किया गया है। इस शहर में अब तक इस प्रोजेक्ट के तहत 2 हजार करोड़ के कार्य चल रहे हैं। साथ ही 500 करोड़ के कार्य और प्रस्तावित हैं। उदयपुर नगर निगम के अतिरिक्त मुख्य अभियंता अरुण व्यास ने बताया कि कई आयाम हैं जिस पर काम कर एक शहर को स्मार्ट बनाते हैं। उन्होंने जो बातें साझा की वह इस प्रकार है।
एक नजर में उदयपुर में हुआ खर्च
- 34 करोड़ के कार्य वहां अब तक पूरे हो चुके हैं।
- 1958 करोड़ के कार्य अभी चल रहे हैं।
- 38 करोड़ के कार्यों के टैंडर हुए हैं।
- 70 करोड़ के टैंडर होने हैं।
- 450 करोड़ के कार्यों की डीपीआर बनी है।
स्मार्ट सिटी की उदयपुर से जोधपुर से तुलना
- स्मार्ट सिटी में प्राचीन बावडिय़ों और वॉल सिटी के संरक्षण पर अच्छा काम हुआ है। जोधपुर में इसकी बहुत जरूरत है।
- आयड़ रिवर फ्रंट पर काम हो रहा है। जोधपुर में जोजरी रिवर फ्रंट की डीपीआर बन रही है।
- स्मार्ट सिटी में सिटी गैस डिस्ट्रीब्सूशन सिस्टम पर 90 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। इस सिस्टम की जोधपुर में सख्त जरूरत है।
- वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट पर उदयपुर में 2 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। जोधपुर में सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट आज तक एक सपना है।
पत्रिका व्यू :
जोधपुर के स्मार्ट सिटी में शामिल नहीं होने का दर्द मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी बयां कर चुके हैं। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल करने का अधिकार भले ही केन्द्र सरकार के हाथ में हो। लेकिन मुख्यमंत्री चाहे तो उस स्तर की सुविधाएं और मॉनिटरिंग हमारे शहर में भी करवा सकते हैं। वे काम जो स्मार्ट सिटी में होते हैं हमारे शहर में भी हो सकते हैं। बजट भी हमारे शहर को मिला है लेकिन खास बात यह है कि यह कहां और कैसे खर्च होगा इसकी मॉनिटरिंग नहीं। कई प्रोजेक्ट डीपीआर से आगे नहीं बढ़ पाते, लेकिन वाकई में जोधपुर को स्मार्ट से आगे बढ़ाना है तो जो घोषणाएं हुई है उनको अंजाम तक पहुंचाना होगा।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2N400Po
0 comments:
Post a Comment