जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने हनुमानगढ़ जिले में पिछले डेढ़ साल से लापता एक महिला एवं उसके तीन बच्चों को नहीं ढूंढ पाने पर नाराजग़ी जताते हुए बीकानेर रेंज आइजी को इस मामले की व्यक्तिगत मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि गुमशुदा लोगों की तलाश के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की अगुवाई में टीम गठित की जाए।
न्यायाधीश संदीप मेहता व न्यायाधीश अभय चतुर्वेदी की खंडपीठ ने सादुल की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के बाद 9 दिसंबर को तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने आदेश दिए। याचिकाकर्ता की पत्नी और तीन बच्चे 13 मार्च, 2018 से लापता हैं। इनकी गुमशुदगी हनुमानगढ़ जिले के पीलीबंगा थाने में दर्ज है। याचिकाकर्ता ने पत्नी व बच्चों को नहीं ढूंढ पाने पर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी।
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता फरजंद अली ने पुलिस की ओर से प्राप्त तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करते हुए कहाकि प्रयासों के बावजूद अभी तक लापता लोगों का पता नहीं चल पाया है। इसी प्रकरण में पुलिस की लापरवाही पर तत्कालीन पुलिस महानिदेशक कपिल गर्ग भी 20 फरवरी को कोर्ट में पेश हो चुके हैं। तब उन्होंने लापता लोगों को ढूंढने में राजस्थान पुलिस की बेहतर स्थिति का दावा किया था, लेकिन इसी मामले में पुलिस अब तक कोई सुराग नहीं लगा पाई है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने हनुमानगढ़ जिले में पिछले डेढ़ साल से लापता एक महिला एवं उसके तीन बच्चों को नहीं ढूँढ पाने पर नाराजग़ी जताते हुए बीकानेर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक को इस मामले की व्यक्तिगत मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में गुमसुदा लोगों की तलाश के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की अगुवाई में एक टीम गठित की जाए।
न्यायाधीश संदीप मेहता व न्यायाधीश अभय चतुर्वेदी की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता सादुल की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के बाद 9 दिसंबर को तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने आदेश दिए।याचिकाकर्ता की पत्नी और तीन बच्चे 13 मार्च, 2018 से लापता है, जिसकी गुमशुदगी का मामला हनुमानगढ़ जिले के पीलीबंगा थाने में दर्ज है। याचिकाकर्ता ने पत्नी व बच्चों को नहीं ढूंढ पाने पर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी।
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता फरजंद अली ने पुलिस की ओर से प्राप्त तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करते हुए कहाकि प्रयासों के बावजूद अभी तक लापता लोगों का पता नहीं चल पाया है। ग़ौरतलब है कि इसी प्रकरण में पुलिस की लापरवाही पर तत्कालीन पुलिस महानिदेशक कपिल गर्ग भी 20 फरवरी को कोर्ट में पेश हो चुके हैं। तब उन्होंने लापता लोगों को ढूंढने में राजस्थान पुलिस की बेहतर स्थिति का दावा किया था, लेकिन इसी मामले में पुलिस अब तक कोई सुराग नहीं लगा पाई है।
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