रणवीर चौधरी/जोधपुर. स्मैक, अफीम या चरस जैसे नशीले पदार्थ चोरी-छिपे ही मिलते हैं लेकिन देश की सबसे सुरक्षित जेलों में शुमार जोधपुर जेल में यह सब आसानी से उपलब्ध है। यही नहीं, कैदी जेल में मोबाइल चलाते हैं, सोशल मीडिया पर फोटो अपलोड करने के साथ अपराध का नेटवर्क और हथियारों की तस्करी भी करते हैं। जेल में मोबाइल से हथियारों की तस्करी करने वाले गिरोह को पकडऩे के कुछ दिन बाद एक कैदी का जेलर से विवाद हो गया। इसके बाद कैदी ने मोबाइल से वीडियो बनाकर आशंका जताई कि उसे अन्य जेल में शिफ्ट किया जा सकता है।
10 अक्टूबर को कैदी को उदयपुर जेल में स्थानांतरित कर दिया गया। इसके तत्काल बाद करीब तेरह वर्ष से आजीवन कारावास की सजा काट रहा कराड़ी (पाली) निवासी आजादसिंह पुत्र लक्ष्मणसिंह राजुपरोहित ने वीडियो वायरल कर दिया। इसमें कैदियों के पास मोबाइल और ड्रग होने की पोल खोलते हुए बताया कि नए बंदियों से वसूली कर जेल में मोबाइल, ड्रग्स, अफीम व स्मैक उपलब्ध कराई जाती हैं। वीडियो में जेलर पर सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने का आरोप लगाते हुए कहा कि जेलर से विवाद के कारण उसका ट्रांसफर अन्य जेल में किया गया।
2 हजार में बीड़ी का बंडल, हजार रुपए में गुटखा व जर्दा
कैदी के अनुसार जेल में बंदी व कैदियों को 2 हजार रुपए में बीड़ी का बंडल, एक हजार रुपए में गुटखा या जर्दे के पाउच, 600 रुपए किलो चाय की पत्ती, 500 रुपए किलो धनिया, 500 रुपए किलो मिर्ची पाउडर, 100 रुपए किलो में शक्कर मिलती है।
रेडियो में सिम डाल बनाते हैं मोबाइल
कैदी रेडियो के अंदर मोबाइल का सर्किट व चिप लगाकर मोबाइल बनाते हैं। यह काम जेल के अंदर ही किया जाता है। रेडियो को मोबाइल बनाने का वीडियो भी बनाया गया है।
कैदी ने बदला लेने के लिए वीडियो किए वायरल
जेल प्रशासन ने बताया कि हार्डकोर अपराधी आजादसिंह और उसके कुछ साथी जेल में नशीले पदार्थ और मोबाइल रखता थे। वह अपने बैरक में जेल प्रहरी को भी नहीं आने देता था। इसी कारण उसे वर्ष 2015 में जोधपुर जेल से श्रीगंगानगर, वहां से वर्ष 2016 में अजमेर की हाइसिक्योरिटी जेल और वर्ष 2018 में जोधपुर जेल शिफ्ट किया गया। इसके बाद बार-बार शिकायतें मिलने पर जेल मुख्यालय से उसे उदयपुर भेजने की अनुमति मांगी गई। गत 10 अक्टूबर को उसे उदयपुर जेल शिफ्ट कर दिया गया। इसके बाद उसने बदला लेने और बदनाम करने के लिए वीडियो वायरल किए।
बंदी व प्रहरी ड्रग छुपाकर लाते हैं
जेल में सघन तलाशी के बाद ही बंदी व प्रहरी को प्रवेश दिया जाता है। कुछ बंदी व प्रहरी मुंह या जूतों में ड्रग छुपाकर लाते हैं। ड्रग मशीन में डिटेक्ट भी नहीं हो पाती। तलाशी अभियान चलाकर कई बार मोबाइल व ड्रग बरामद किए गए।
जगदीश प्रसाद पूनिया, जेलर
बाहर की एजेंसी से जांच करवाएंगे
वीडियो पुराना है। यह कहां बनाया और इसमें दिखने वाले बंदियों की जांच करवाई जाएगी। पूरे मामले की जांच बाहर की एजेंसी से भी करवाएंगे।
कैलाश त्रिवेदी, जेल अधीक्षक
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