जोधपुर. भारत और पाकिस्तान के टिड्डी नियंत्रण अधिकारियों के मध्य गुरुवार को फेल हुई वार्ता के पीछे पाकिस्तानी सेना का हाथ था। सूत्रों के अनुसार पाक सेना ने रेंजर्स को जीरो लाइन का दरवाजा नहीं खोलने के निर्देश दिए थे, जिसके कारण पाकिस्तान के कृषि विभाग के टिड्डी नियंत्रण अधिकारी खोखरापार के कमरों में ही बैठे रह गए। उधर संयुक्त राष्ट्र के कृषि एवं खाद्य संगठन (एफएओ) ने दोनों देशों के मध्य फेल हुई वार्ता को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। संयुक्त राष्ट्र की ओर से जारी बयान में कहा गया कि हालांकि दोनों ही देश टिड्डी नियंत्रण करने के लिए प्रतिबद्ध हैं लेकिन वार्ता असफल हो गई। ऐसे में अब 21 नवंबर को फिर से बाड़मेर के मुनाबाव में ही दोनों देशों की बैठक होगी। इसमें अक्टूबर और नवंबर दोनों के आंकड़े पर चर्चा की जाएगी। एफएओ ने इस संबंध में दोनों देशों को ई-मेल से सूचित किया है। गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के टिड्डी नियंत्रण अधिकारियों की मासिक बैठक गुरुवार को बाड़मेर के मुनाबाव में होनी थी। तय समय के अनुसार सीमा सुरक्षा बल के जवान सुबह 9.30 बजे झंडा लेकर जीरो लाइन पर खड़े हो गए लेकिन पाकिस्तानी रेंजर्स ने अपनी तरफ का दरवाजा भी नहीं खोला। दोपहर तक भारतीय अधिकारी इंतजार करते रहे। शाम को पाकिस्तान की तरफ से एफएओ को ई-मेल करके भारत द्वारा वार्ता तोडऩे का आरोप लगाया गया। इसके बाद भारत की ओर से भी काउंटर जवाब दिया गया था। इस मामले में शुक्रवार को इटली की राजधानी रोम स्थित एफएओ मुख्यालय में चर्चा हुई।
‘दोनों देशों के मध्य वार्ता का टूटना दुर्भाग्यपूर्ण रहा। अब अगली बैठक नवंबर में होगी। दोनों देश के अधिकारियों से अनुरोध है कि वह बैठक से एक दिन पहले दूरसंचार पर बात करके बैठक सुनिश्चित कर लें।’
कीथ क्रिशमैन, प्रतिनिधि विश्व खाद्य एवं कृषि संगठन रोम (इटली)
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