जोधपुर. शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती मरीज के परिजन ने गुरुवार शाम अस्पताल के फार्मा स्टोर से एंटीबायोटिक इंजेक्शन खरीदा। इंजेक्शन को पाउडर में मिक्स करने के दौरान रंग ब्राउन हो गया। इस पर परिजन को इंजेक्शन नकली होने का अंदेशा हुआ। औषधि नियंत्रण संगठन की टीम ने मौके पर पहुंच प्रारंभिक जांच-पड़ताल शुरू की। सैंपल की जांच रिपोर्ट आने पर ही असलियत का पता चलेगा।
गोयल अस्पताल में प्रवीणसिंह भर्ती पिता के लिए वेंकोमाइसिन हाइड्रोक्लोराइड नामक दवा (ब्रांड नाम दूसरा) का इंजेक्शन लेने मेडिकल स्टोर गए थे। इंजेक्शन को पाउडर में मिक्स करने के दौरान दवा का रंग बदल गया तो उन्होंने वापस दवा स्टोर जाकर बताया तो स्टोर वाले ने कहा कि वे इंजेक्शन बदल देंगे। साथ ही उसने कहा कि यह कंपनी की गलती है।
अस्पताल संचालक डॉ. सुयश गोयल ने बताया कि गत दो दिन पूर्व परिजन का मरीज सीरियस था। परिजन ने दवा के पैसे एक दिन बाद देने को कहा तो मेडिकल स्टोर वाले ने मना कर दिया। इस बात पर मेडिकल स्टोर पर हाथापाई हो गई। अगले दिन हमने परिजन को समझाया तो परिजन ने माफीनामा दे दिया। अब परिजन ने शिकायत की है कि दवा का रंग बदल गया। जबकि उनके यहां दवा प्राधिकृत कंपनी से खरीदी जाती है। हमने तो परिजन को ड्रग डिपार्टमेंट में शिकायत करने के लिए कहा है। परिजन की नियत बदनाम करने की है। जबकि इलाज में मरीज के पैसे नहीं लग रहे। मरीज रेलवेकर्मी है और स्वस्थ है। उसे इंजेक्शन भी नहीं लगा है।
सहायक औषधि नियंत्रण राकेश वर्मा ने बताया कि सैंपल लेने के साथ रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। जिस हॉल सेलर से दवा खरीदी है, वहां भीे टीम भेजी है। वे परिजन की शिकायत और मौजूद दवाइयों के सैंपल लेंगे। मौके पर जांच-पड़ताल के दौरान डीसीओ ससमिता, अनिरुद्ध खत्री, किशोर पंवार व हेमा सोलंकी भी मौजूद थे।
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