देवस्थान विभाग के रवैये पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

पोस्ट पसंद आये तो लाइक जरुर करे ?

जोधपुर.

राजस्थान हाईकोर्ट (rajasthan highcourt) ने देवस्थान विभाग (Devasthan department) की राज्य और राज्य से बाहर स्थित संपत्तियों सहित किराये पर दी गई दुकानों व परिसरों का अपेक्षित ब्यौरा देने में विफल रहने पर राज्य सरकार के प्रति नाराजगी जताई है।

कोर्ट ने सरकार को तीन सप्ताह में अपेक्षित ब्यौरा देने के निर्देश देते हुए कहा कि इस बार विफल रहने पर अगली सुनवाई पर देवस्थान विभाग के आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर यह स्पष्टीकरण देना होगा कि उनके खिलाफ क्यों न अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाए।

वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा और न्यायाधीश विनीतकुमार माथुर की खंडपीठ में स्वप्रसंज्ञान के आधार पर दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता मनीष व्यास ने बताया कि कोर्ट के आदेश की पालना में अतिरिक्त शपथ पत्र पेश कर दिया गया है।

उन्होंने बताया कि देवस्थान विभाग के पास वर्तमान में करीब 2090 संपत्तियां हैं, जिनमें 544 आवासीय, 1498 व्यावसायिक, 45 राजकीय तथा 3 अन्य प्रकृति की हैं।

इनसे 3.90 करोड़ रुपए की वार्षिक आय होती है। इस रिपोर्ट को अधूरा बताते हुए खंडपीठ ने कहा कि अपेक्षित जानकारी नहीं दी गई है। न ही मंदिरों व संपत्तियों की सूची कोर्ट के समक्ष रखी गई है। कोर्ट ने सरकार को तीन सप्ताह की मोहलत देते हुए अगली सुनवाई 5 नवंबर को मुकर्रर की है।

कोर्ट ने 13 अगस्त को छह सप्ताह में यह बताने के निर्देश दिए थे कि राज्य और राज्य से बाहर देवस्थान विभाग के पास कितनी संपत्तियां हैं और इन संपत्तियों में कितनी दुकानों या परिसरों को किराये पर दिया हुआ है।

किराये पर दी गई संपत्तियों का वर्गीकरण किस आधार पर किया गया है, किराये का आधार क्या है और उसका पुनर्निर्धारण कैसे किया जाता है। संपत्तियां लीज या लाइसेंस पर दी गई हैं या किराये के आधार पर।

इन संपत्तियों में कारोबार संचालित करने वाले व्यापारियों का जीएसटी रिटर्न के आधार पर टर्नओवर कितना है। संपत्तियां सबलेट करने योग्य है या नहीं।



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/3506yFA
Share on Google Plus

About Atul

This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.

0 comments:

Post a Comment