जोधपुर.
राजस्थान हाईकोर्ट (rajasthan highcourt) ने गुरुवार को एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान वर्ष 2017 में राज्य सरकार की ओर से दिए गए एक प्रत्युत्तर में यह तथ्य देखकर हैरानी जताई कि करीब दो हजार स्कूलों में इसलिए बिजली नहीं है, क्योंकि वह दूरदराज स्थित हैं। कोर्ट ने पूछा कि जोधपुर जिला आदिवासी इलाका नहीं है तो दो हजार गांव-ढ़ाणियां बिजली से महरूम कैसे हो सकती है? कोर्ट ने राज्य सरकार (state govt.) को वर्तमान तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश के साथ अगली सुनवाई 13 नवंबर तय की है।
वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा और न्यायाधीश विनीतकुमार माथुर की खंडपीठ में लीगल एड एंड अवेयरनेस कमेटी, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU Jodhpur) की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता राजवेंद्र सारस्वत ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से स्कूलों में उपलब्ध संसाधनों के बारे में केंद्र सरकार (centeral govt. of India) को गलत तथ्य उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।
वास्तविकता यह है कि राजकीय स्कूलों में बुनियादी संसाधनों का अभाव है। इस संबंध में उन्होंने सरकार के जवाब के बाद किए गए भौतिक सर्वे का उल्लेख करते हुए बताया कि सरकार के दावे और जमीनी हकीकत में अंतर है।
खंडपीठ ने वर्ष 2017 में दिए गए सरकार के जवाब के मुताबिक करीब आठ सौ स्कूलों में ही बिजली है। करीब दो हजार स्कूलें बिजली से महरूम हैं। बताया गया कि ये स्कूलें दूरदराज में स्थित हैं। कोर्ट ने कहा कि दूरदराज का मतलब है कि वहां की गांव-ढ़ाणियां भी बिजली से वंचित होंगी। सरकार ने मौजूदा स्थिति बताने के लिए समय मांगा।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2pIlKqL
0 comments:
Post a Comment