सुनो साहब! आप ध्यान देते तो प्रकृति की बरसाई पूरी ‘खुशियां’ जलाशयों में छलक रही होती

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अविनाश केवलिया. जोधपुर.

इस बार आसमान से खुशियां बहुत बरसी। मानसून का सीजन अब तक जारी है। औसत से ज्यादा बारिश हुई है। लेकिन फिर भी उन खुशियों का दसवां हिस्सा भी हम सहेज नहीं पाए। आज बात तीन उन बड़े जलाशयों की करते हैं जिनको हम पूरा भर उसका पानी सहेज लेते तो शायद स्थितियां कुछ हद तक सुखद हो सकती थी। तीनों जलाशयों में महज 135 एमसीएफटी पानी ही सहेजा गया है। जो जोधपुर शहर को सिर्फ 10 दिन ही पानी पिला सकता है।
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जसवंत सागर बांध : अवैध बजरी खनन के गड्ढे बने रुकावट
हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का आधार जिले का सबसे बड़ा जसवंत सागर बांध इस बार भी खाली रह गया। ऐसा नहीं कि बांध के केचमेंट एरिया में बारिश नहीं हुई, बारिश हुई और भरपूर हुई। लेकिन नाग पहाड़ से लेकर बांध के पेटे तक पानी पहुंचाने वाली नदियों एवं बाळों में बजरी माफियाओं ने अनाधिकृत रूप से बजरी का इतना खनन कर दिया की गड्ढे बन गए। यह भी सच है कि 12 कोस लंबे और 12 कोस चौड़े इस बांध के भरने से 13 गांव की हजारों बीघा भूमि में सिंचाई होती रही है।

क्षमता का एक फीसदी पानी भी नहीं

- बांध भराव क्षमता 1865 एमसीएफटी है।
- 24 फीट इस बांध का गेज है।

- वर्तमान में बांध में मात्र ढाई फीट पानी है।

- यानि 15 एमसीएफटी पानी भरा है।

- औसत निकाला जाए तो 1 प्रतिशत से भी कम पानी।
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उम्मेद सागर बांध : कैचमेंट में अतिक्रमण, नहरें क्षतिग्रस्त कर दी

रियासतकालीन उम्मेद सागर बांध का निर्माण 100 साल पहले हुआ था। इसका वर्तमान स्वरूप 1933 में आया। तब से इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। इसके कैचमेंट में लगातार अतिक्रमण होते गए। कई मकान गए। पानी आवक की नहरें क्षतिग्रस्त हो गई। 38 फीट का गेज है लेकिन यह भी अब दिखता नहीं। 348 एमसीएफटी थी पहले भराव क्षमता। लेकिन अब मिट्टी और अन्य कारणों से गेज कम हो गया और महज 280 एमसीएफटी पानी ही इसमें भरा जा सकता है। लेकिन वह भी पिछले कई दशकों से नहीं भरा है।

क्षमता का 15 फीसदी पानी ही भर पाया

- बांध भराव क्षमता 280 एमसीएफटी है।

- 38 फीट इस बांध का गेज है।

- वर्तमान में बांध में 40 एमसीएफटी पानी भरा है।
- औसत निकाला जाए तो 15 प्रतिशत ही पानी है।

- अभी इस पानी को पीएचईडी लिफ्ट कर फिल्टर हाउस में ले रहा है।

- पिछले साल 25 एमसीएफटी पानी आया था।

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सुरपुरा बांध : अतिक्रमण चिह्नित पर कार्रवाई नहीं

सुरपुरा बांध जो भी रियासत काल में ही बना इस बार इसमें क्षमता का करीब 10 प्रतिशत पानी ही है। लेकिन इस बांध में सीपेज की समस्या इतनी है कि यहां पानी ठहरता ही नहीं। दूसरा खुद जल संसााधन विभाग और प्रशासन ने यहां कई अतिक्रमण चिह्लित कर रखे हैं। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं।

यहां भी उम्मीदों का 10 प्रतिशत पानी ही पहुंचा

- बांध भराव क्षमता 21.65 मिलीयन क्यूबिक मीटर है।

- इस बारिश में 10 प्रतिशत से थोड़ा ज्यादा पानी है।

- बांध में रिजर्ववायर के अलावा करीब 80 एमसीएफटी पानी है।

- इस पानी से जोधपुर की छह दिन की प्यास बुझा सकते हैं।

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एक्सपर्ट व्यू ::: फोटो

कैचमेंट में माइंस, खदानों के गड्ढों में भर गया पानी

हमारे शहर के प्रमुख जलस्रोतों के कैचमेंट में माइंस कट गई है। बारिश होती है तो माइंस के गड्ढों में पानी भर जाता है। पिछले चार-पांच दशक में यह समस्या आई है। पहले जब जवाई बांध की नहर से पानी हम कायलाना-तख्तसागर में जमा करते थे तो मानसून सीजन में चार से छह माह तक पानी बारिश का ही काम में लिया जाता था। जब जवाई का पानी हम बंद कर देते थे। लेकिन अब राजीव गांधी लिफ्ट केनाल आ गई है। इसलिए हमने प्राकृतिक जलस्रोतों पर ध्यान देना कम कर दिया। आज मानसून में भी उतना पानी नहीं आ पाता कि हम नहर की सप्लाई रोक कर बारिश का पानी उपयोग में लें। खान विभाग, पीएचईडी और जल संसाधन विभाग मिलकर ऐसा कोई प्लान बनाए कि खदानों में भरने वाला पानी संसाधनों से खाली हो और एक चैनल के जरिये जलस्रोतों में आ जाए। इससे खदान मालिकों की परेशानी मिटेगी व जल समस्या भी दूर होगी। पहले एक ऐसा प्रपोजल हमने दिया था।

- केएलएम माथुर, सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता, पीएचईडी



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