अमित दवे/जोधपुर. जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय भाभा आणविक अनुसंधान संस्थान (बार्क) मुम्बई के साथ मिलकर रेडिएशन टेक्नोलॉजी से जीरा व ईसबगोल की नई किस्में विकसित करेगा। ये किस्में अन्य तरीकों से विकसित किस्मों से ज्यादा कारगर होंगी। इसी तकनीकी से जीरा, ईसबगोल, प्याज, सब्जियों व मसाला फसलों में कटाई के बाद होने वाले नुकसान को रोकने का काम भी किया जाएगा।
जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय व ‘बार्क’ के बीच अनुसंधान के विभिन्न क्षेत्रों और कृषि में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए किए गए समझौता किया गया है। इसके तहत महत्वपूर्ण फ सलों की उन्नत और रोगरोधी किस्मों पर काम किया जाएगा। ये किस्में पश्चिमी राजस्थान की जलवायु में अधिक और गुणवत्तापूर्ण उपज देने में सक्षम होंगी। जोधपुर कृषि विवि ‘बार्क’ के साथ एमओयू करने वाला प्रदेश का पहला कृषि विवि है।
हाइड्रोजेल व ट्राइकोडर्मा पर होगा अनुसंधान
‘बार्क’ द्वारा उत्पादित हाइड्रोजेल भूमि में पानी को सोखकर पौधों को उपलब्ध कराता है। इससे से पश्चिमी राजस्थान में कम पानी से फसलों का उत्पादन होगा। यह उत्पाद यह अपने वजन से ४०० गुना अधिक पानी को रोककर रखता है। विवि में इस उत्पाद पर अनुसंधान किए जाएंगे। ‘बार्क ’ के सहयोग से ट्राइकोडर्मा मित्र फफूंद का उत्पादन कर किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी। यह फफूंद फसली बीमारियों की रोकथाम करने में मदद करती है।
विवि के शोधार्थी जाएंगे ‘बार्क’
‘बार्क ’ में स्थित फूड टेक्नोलॉजी, मॉल्यूकूल बॉयोलॉजी, न्यूक्लियर एग्रीकल्चर, बॉयो टेक्नोलॉजी आदि उच्च स्तरीय प्रयोगशालाओं में विवि के विवि के स्नातकोत्तर व पीएचडी के विद्यार्थियों व फेकल्टी को अध्ययन व अनुसंधान का मौका मिलेगा। यह करार आगामी 5 वर्षो के लिए किया गया है। जिसके तहत ‘बार्क ’ कृषि विवि को 50 लाख रुपए की धनराशि देगा। इस राशि का उपयोग अनुसंधान व प्रयोगशालाओं के विकास के लिए किया जाएगा।
इनका कहना है
‘दो दिन पूर्व ‘बार्क ’ के सह निदेशक डॉ. वीपी वेणुगोपालन कृषि विवि में थे। उन्होंने समझौते के तहत दोनों संस्थाओं द्वारा जल्द ही काम शुरू करने की मंशा जाहिर की। इस समझौते से विभिन्न फसलों, किस्मों का विकास होगा और विद्यार्थियों को ‘बार्क ’ में करने का अवसर भी मिलेगा।
डॉ बीआर चौधरी, कुलपति, कृषि विवि जोधपुर
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