जोधपुर.
बार कौंसिल ऑफ राजस्थान (bar council of rajasthan) के कुनबे में करीब डेढ़ महीने से चल रही कलह के बाद दोनों पक्षों ने समझौते की राह पकड़ने का इरादा जाहिर किया है।
बीसीआर चेयरमैन चिरंजीलाल सैनी (BCR Chairman Chiranjilal Saini) की ओर से बार कौंसिल ऑफ इंडिया (bar council of India) में दायर निगरानी याचिका की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने समझौते की संभावनाओं को देखते हुए अग्रिम आदेश पारित नहीं करने की आग्रह किया।
बीसीआइ (BCI) कमेटी ने समझौते के प्रयास को अच्छा संकेत बताते हुए दोनों पक्षों की मध्यस्थता के लिए एक उप समिति गठित की है।
बीसीआइ चेयरमैन मननकुमार मिश्रा (BCI Chairman Manankumar Mishra) की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय कमेटी के सामने निगरानी याचिका की सुनवाई के दौरान पेश हुए बीसीआर चेयरमैन सैनी और प्रतिवादी पक्ष के कौंसिल सदस्य रामप्रसाद सिंगारिया ने समझौते की संभावना बताते हुए कुछ सप्ताह तक कोई अग्रिम आदेश पारित नहीं करने की गुजारिश की।
कमेटी के समक्ष हाल ही राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ का आदेश भी रखा गया, जिसमें कोर्ट ने बीसीआर के बहुमत प्राप्त समूह के सदस्यों को यह छूट दी थी कि वे नए सिरे से बीसीआर के साधारण सभा की विशेष बैठक आहूत करने का आग्रह कर सकते हैं, जिस पर एक सप्ताह में चेयरमैन को विधि सम्मत कार्रवाई करनी होगी।
कमेटी के समक्ष दोनों पक्ष ने कहा कि समझौते की संभावना को देखते हुए फिलहाल विशेष बैठक आहूत करने की जरूरत नहीं है।
इस पर कमेटी ने अग्रिम आदेश तक विशेष बैठक आयोजित नहीं करने के निर्देश दिए। कमेटी ने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता के लिए एक सब कमेटी गठित की है, जिसमें हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बनवारीलाल शर्मा तथा बीसीआर सदस्य एससी श्रीमाली को सदस्य बनाया गया है।
कमेटी से 10 सितंबर तक दोनों पक्षों के बीच समझौता करवाने के साथ रिपोर्ट पेश करने की अपेक्षा की गई है। साथ ही कहा गया कि यदि आवश्यक हो तो बीसीआइ कमेटी से भी चर्चा की जा सकती है।
कमेटी ने सैनी को जोधपुर के उदयमंदिर थाने में दर्ज एफआईआर पर भी फिलहाल कोई अग्रिम कार्रवाई नहीं करने को कहा है। सुनवाई की अगली तिथि 14 सितंबर को सभी प्रतिवादियों को 1 बजे कमेटी के समक्ष उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।
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