जोधपुर।
शहर में आगजनी की अधिकांश घटनाएं औद्योगिक क्षेत्रों में होती है। अधिकांश इकाइयां पर्याप्त फायर सेफ्टी सिस्टम नहीं होने की वजह से आग के मुहाने पर खड़ी है। औद्योगिक क्षेत्रों में नियमों को तांक पर रखकर फैक्ट्रियों का संचालन किया जा रहा है। जिन पर संबंधित विभागों की ओर से निरीक्षण या ठोस कार्यवाही भी नहीं होती है। शहर के बासनी, बोरानाडा, हैवी इंडस्ट्रियल एरिया, लाइट इंडस्ट्रियल एरिया, न्यू पावर हाउस रोड, सालावास, तनावड़ा, सांगरिया, मण्डोर, पाली रोड सहित कई औद्योगिक क्षेत्रों में करीब 4 से 5 हजार छोटी-बड़ी विभिन्न इकाइयां चल रही हैं। इनमें करीब 60 प्रतिशत इकाइयों में आगजनी से निपटने के उपाय-उपकरण नहीं है। कई इकाइयों में लगे फायर फाइटिंग उपकरणों के सही संचालन के लिए इकाइयों को आगजनी से बचाव का मॉक ड्रिल करना होता है। उपकरणों की एक्सपायरी डेट निकलने के बाद उनके स्थान पर नए उपकरण भी करना होता है, जिनकी जांच होती है। फिलहाल, एेसा कहीं नहीं हो रहा है।
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कइयों के पास फ ायर एनओसी तक नहीं
फैक्ट्री व बॉयलर एक्ट के अनुसार, प्रत्येक औद्योगिक इकाई में आग से निपटने के उपकरण-संसाधन आदि होने जरूरी हैं। इसके अलावा, इकाइयों के संचालन के लिए नगर निगम से जारी फायर एनओसी होना जरूरी है। फ ायर एनओसी से स्पष्ट हो जाता है कि इकाई में फायर फाइटिंग उपकरण व इकाई आगजनी की रिस्क से बाहर है। हाल यह है कि आवेदन के बाद भी अधिकांश उद्यमियों को निगम से एनओसी जारी नहीं हुई है।
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सबसे ज्यादा आगजनी हैण्डीक्राफ्ट इकाइयों में
सुरक्षा खामियों व लापरवाही की वजह आगजनी की सर्वाधिक घटनाएं हैण्डीक्राफ्ट इंडस्ट्री में होती हैं। इन इकाइयों में वुडन मैटेरियल के उपयोग करने, उससे निकलने वाले बुरादे, पॉलिश मैटेरियल, पैकिंग मैटेरियल तथा इकाइयों के कच्चे- पक्के शेड्स की वजह से आग तेजी के साथ फैलती है। एेसी स्थिति में सुरक्षा के लिए मौजूद फ ायर फ ाइटिंग उपकरण भी धरे रह जाते है । केमिकल, प्लास्टिक, टैक्सटाइल, स्टील, ग्वारगम इकाइयों में भी सुरक्षा खामियों व लापरवाही की वजह से आगजनी की घटनाएं होती रहती हैं।
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हैण्डीक्राफ्ट इकाइयों में आगजनी की बड़ी घटनाएं
वर्ष--------- इकाइयां---- नुकसान
2014-15 ---- 16 ----- करीब 24 करोड़
2015-16 ---- 10 ----- करीब 16 करोड़
2016-17 ---- 09 ----- करीब 12 करोड़
2017-18 ---- 18 ----- करीब 11 करोड़
2018-19 ---- 12 ----- करीब 08 करोड़ (10 मार्च तक)
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स्टाफ की कमी
निगम में स्टाफ की कमी है, इसलिए इकाइयों का निरीक्षण नहीं हो रहा है। निगम स्टाफ व उपलब्ध संसाधनों के सहयोग से हर इकाई में फायर फाइटिंग सिस्टम की जांच की मुहिम चलाएंगे।
घनश्याम ओझा, महापौर
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हर इकाई का निरीक्षण नहीं कर सकते है। विभाग की पॉलिसी अनुसार किसी इकाई का ऑनलाइन निरीक्षण ही करना होता है।
मुकुल राजवंशी
उप मुख्य निरीक्षक,कारखाना व बॉयलर विभाग
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