जोधपुर.
राज्य में चिकित्सा सुविधाओं की बदहाली को लेकर स्वप्रेरणा से दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान मंगलवार को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रोहित कुमार सिंह राजस्थान हाईकोर्ट में पेश हुए। केंद्र और राज्य वित्त पोषित योजनाओं के तहत स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च बजट का अपेक्षित ब्यौरा नहीं देने पर कोर्ट ने असंतोष जताते हुए राज्य सरकार को अतिरिक्त शपथ पत्र पेश करने के आदेश दिए हैं। अगली सुनवाई 9 अप्रैल को मुकर्रर की गई है।
वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा तथा न्यायाधीश दिनेश मेहता की खंडपीठ में सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता पंकज शर्मा के साथ अतिरिक्त मुख्य सचिव रोहित कुमार सिंह कोर्ट में पेश हुए। खंडपीठ को बताया गया कि कोर्ट में पालना रिपोर्ट पेश कर दी गई है। हालांकि, यह रिपोर्ट कोर्ट के रिकॉर्ड पर नहीं आ पाई। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कोर्ट को मौखिक रूप से बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं पर केंद्र व राज्य की वित्तीय मदद से योजनाएं संचालित की जाती हैं। उन्होंने अब तक खर्च बजट व केंद्र से अपेक्षित राशि के संबंध में कोर्ट को कुछ जानकारी दी, जिस पर खंडपीठ ने पूछा कि अगर करोड़ों रुपए का बजट खर्च किया गया है तो धरातल पर कुछ नजर क्यों नहीं आ रहा।
स्वास्थ्य सेवाओं को राज्य की अहम जिम्मेदारी बताते हुए खंडपीठ ने कहा कि सरकार को इस संबंध में गंभीर प्रयास करने होंगे और लेटलतीफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अतिरिक्त मुख्य सचिव को संपूर्ण विवरण लिखित में पेश करने को कहा गया है। सरकार की ओर से पेश पालना रिपोर्ट में बताया गया कि राज्य के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में 34 टीमों ने 279 लेबर रूम का निरीक्षण किया है, जिनमें सामने आई कमियों के आधार पर आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। कत्र्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने पर ओसियां के ब्लॉक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निलंबित किया गया है, जबकि टोंक के जिला अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डा.सुनीता राजौरा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य विभाग के गैर राजपत्रित संवर्ग के स्वीकृत पदों की संख्या 88,465 है, लेकिन वर्तमान में 55,287 पदों पर ही कार्मिक कार्यरत है। 33,178 पद खाली होने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही है।
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