पश्चिमी एशिया ने बिगाड़ा उत्तरी भारत का मौसम : इस बार अगले महीने से ही आंधी, मानसून में देरी की आशंका

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गजेंद्र सिंह दहिया/जोधपुर. पश्चिमी एशिया में भूमध्यसागर, लाल सागर और काला सागर पर इस साल लम्बे समय तक उच्च दबाव कायम रहने और हवा की दिशा नहीं बदलने से राजस्थान सहित उत्तरी भारत के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। तीनों सागरों की नमी यानी पश्चिमी विक्षोभों की संख्या औसतन 3-4 से बढकऱ 7-8 हो गई है। हर दो दिन बाद बादल आ रहे हैं। मार्च में हवा की दिशा उत्तरी-पश्चिमी हो जानी चाहिए थी लेकिन अभी भी उत्तर दिशा से हवा बह रही है, जिससे सूरज धरती को गर्म नहीं कर पा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार मई-जून में चलने वाली आंधी का पैटर्न अप्रेल में ही शुरू हो जाएगा लेकिन यह गर्म हवा के रूप में नहीं बल्कि सामान्य हवा के रूप में रहेगा। हवा के झौंको के साथ बरसात भी होगी, जिससे ‘सिस्टम’ हाथों-हाथ खत्म हो जाएगा। राजस्थान के ऊपर लगातार नमी बने रहने से मानसून के प्रवेश में देरी की आशंका बन रही है।

बीकानेर से प्रवेश करेगी आंधी

केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुंसधान संस्थान (काजरी) के पूर्व वैज्ञानिक डॉ अमलकर कहते हैं कि पश्चिमी विक्षोभों ने भारत भूमि की जलवायु को बदल दिया है। वर्तमान में आ रहे पश्चिमी विक्षोभ उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद से घूमकर यहां आ रहे हैं। सामान्यत: विक्षोभ अफगानिस्तान होते हुए जम्मू कश्मीर के हिमालयी क्षेत्रों के ऊपर से निकल जाते हैं लेकिन इस बार नीचे राजस्थान तक आ गए हैं। इससे राजस्थान के ऊपर 3 किमी पर चक्रवाती परिसंचारी तंत्र के कारण लगातार बादल बन रहे हैं। दूसरा बड़ा बदलाव हवा की दिशा में है। अब तक इराक, ईरान और पाकिस्तान से पश्चिमी हवा चल पड़ती तो गर्मी शुरू हो जाती, लेकिन हवा का पैटर्न अभी भी मध्य एशिया से बना हुआ है। अगले महीने आंधी शुरू होगी जो राजस्थान में बीकानेर-श्रीगंगानगर क्षेत्र से प्रवेश करके जालोर के सांचौर से बाहर निकलेगी।

पिछले 6 महीने में ऐसे बदला मौसम
- अक्टूबर में सर्दी शुरू। नमी रहा प्रमुख कारण
- नवम्बर में सामान्य मौसम, दिन में धूप में तपिश थी
- दिसम्बर में तेज सर्दी, कई जगह माइनस में पारा लेकिन अंत में तापमान बढ़ा
- जनवरी की शुरुआत में अधिक तापमान, महीने में 2-4 दिन ही तेज सर्दी रही
- फरवरी में रिकॉर्ड तोड़ सर्दी। राजस्थान के कई हिस्सों में 10 साल का रिकॉर्ड टूटा, 7 पश्चिमी विक्षोभ आए
- मार्च आधा बीत गया, 3 विक्षोभ आ चुके, बादल-बरसात बरकरार, सामान्यत: पारा 35 डिग्री के ऊपर होता है लेकिन वर्तमान में 30 डिग्री के आसपास

बदलाव के कारण
- अत्यधिक पश्चिमी विक्षोभ
- मौसम में नमी अधिक, सामान्यत: 60 प्रतिशत से ऊपर
- हवा का बदला पैटर्न

सामान्य से अधिक आ गए विक्षोभ
इस साल सामान्य से अधिक पश्चिमी विक्षोभ आ गए। यही मौसम बदलाव का कारण है।
शिव गणेश, निदेशक, भारतीय मौसम विभाग जयपुर

पूर्वानुमान लगाना अब आसान नहीं
भारत वैसे भी ऊष्ण कटिबंध में आता है। ग्लोबल वार्मिंग से अब यहां के मौसम का पूर्वानुमान लगाना और कठिन हो जाएगा।
डॉ. ओपी यादव, निदेशक, काजरी जोधपुर

15 साल में पहली बार इतनी बर्फ
अमरीका में भी इस मौसम में बड़ा बदलाव आया। मैंने 15 साल में इतनी बर्फबारी नहीं देखी।
डॉ. रतनलाल, ओहियो स्टेट विश्वविद्यालय, अमरीका



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