जोधपुर.
लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के साथ ही प्रदेश भर में ग्रामीण विकास एवं पंचायतराज विभाग को सुपुर्द सरकार की 100 दिवसीय कार्ययोजना के कई काम अटक गए हैं। इसमें प्रदेश की अधिकतर जिला परिषद के अफसरों की ढिलाई सामने आई हैं। विभाग के आला अधिकारियों ने 8 फरवरी को हुई वीडियो कांफ्रेंस में सभी जिला परिषदों को उनके जिले में चल रहे विकास कार्यों को 100 दिन कार्ययोजना में शामिल कर 28 फरवरी तक स्वीकृतियां जारी करने के निर्देश दिए थे। लेकिन अधिकतर जिला परिषदों की ओर से कई कामों की स्वीकृतियां जारी नहीं की जा सकी। ऐसे में 74 दिन की चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के बाद शेष कार्यों की स्वीकृतियां जारी की जाएगी और गांवों में सरकार की मंशा के अनुरूप विकास की तस्वीर दिखाई देगी।
बताया जा रहा है कि फरवरी माह में सरकार ने कई विभागों के अफसरों को इधर-उधर किया। और तबादलों की सूची लगातार निकल रही थी। ऐसे में अफसरों में तबादलों के समय असमंजस बना रहा। ऐसा ही हाल ग्रामीण विकास व पंचायतराज विभाग के अफसरों का रहा। कई अफसरों का समय स्थानान्तरण का इंतजार, ज्वाइनिंग व रिलीविंग में ही समय बीत गया और सरकार की 100 दिन की कार्ययोजना पर आशातीत अमल नहीं किया गया।
प्रदेश के अफसरों की ढिलाई की पोल 5 मार्च को वीडियो कांफ्रेंस की 8 मार्च को जारी हुई कार्यवाही विवरण से सामने आई है।
प्रोसेडिंग में ग्रामीण आवास योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण विकास कार्यक्रम, महात्मा गांधी नरेगा योजना, स्वच्छ भारत मिशन, पंचायतीराज विभाग के चौदहवें व राज्य वित्त आयोग पंचम के कार्य, ग्रामीण विकास, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के कार्यों की प्रगति रिपोर्ट जारी की गई हैं। जिसके अनुसार जिन जिलों के काम की प्रगति धीमी रही और कार्यों की स्वीकृतियां शेष रही, उन्हें 7 मार्च तक का समय दिया गया था। लेकिन जिलों मे कई विकास कार्यों की स्वीकृतियां जारी नहीं हो सकी। ऐसे में 100 दिन की कार्ययोजना पर पूरा अमल नहीं हो सका।
मुख्यमंत्री जल स्वालम्बन योजना भी अटकी-
तत्कालीन सरकार के समय मुख्यमंत्री जल स्वालम्बन योजना के तहत प्रदेश में प्रथम, द्वितीय, तृतीय चरण के काम तो पूरे हो गए। लेकिन चतुर्थ चरण के कार्य शुरू होने से पहले प्रदेश मेंं विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू हो गई। और इसके बाद प्रदेश में सरकार ही बदल गई। उसके बाद इस योजना के संबंध में जिलों को नए निर्देश नहीं मिले। ऐसे में योजना के चतुर्थ चरण के प्रस्तावित कार्य आगे नहीं बढ़े। नई सरकार बनने के दिन से ग्राम पंचायतों को इस योजना के चतुर्थ चरण का बजट जारी होने का इंतजार था, लेकिन अब लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से यह योजना भी अटक गई है। अकेले अकेले जोधपुर जिले में 41 ग्राम पंचायतों के 101 गांव के 1446 के प्रस्तावित कार्य अटक गए हैं।
आचार संहिता के बाद कार्रवाई-
विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने आचार संहिता लागू होने से पहले ही साफ चेताया था कि जिन जिलों में सरकार के निर्देशों की पालना करने में गंभीरता नहीं दिखाई और 28 फरवरी तक अन्तिम समय में स्वीकृतियां जारी नहीं की, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। चूंकि अब आचार संहिता लागू हो चुकी है, इसलिए अफसरों पर भी कार्रवाई नहीं हो सकती। ऐसे में आचार संहिता समाप्त होने के बाद सरकार के निर्देशों पर गंभीरता नहीं बरतने वाले अफसरों पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है।
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