आसाराम को लेकर आई ये बड़ी खबर, कोर्ट ने सुनाया ऐसा फैसला, समर्थकों में छाई मायूसी

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जोधपुर।

 

नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीडऩ मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम को एक बार फिर से कोर्ट से झटका लगा है। आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका गुरुवार को खारिज कर दी गई। जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने आसाराम की याचिका को खारिज कर दिया। आसाराम की याचिका पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे अपराधियों से कोर्ट को किसी प्रकार की सहानुभूति नहीं है।

 

आसाराम ने पत्नी लक्ष्मी देवी की बीमारी को लेकर अंतरिम जमानत याचिका लगाई थी। आसाराम की तरफ से कहा गया कि वे पांच साल से अधिक समय से जोधपुर जेल में बंद है और उनकी पत्नी की तबीयत खराब है। ऐसे में पत्नी से मिलने के लिए अंतरिम जमानत प्रदान की जाए। जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई के बाद उसे खारिज कर दिया। इस दौरान कोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट भी देखी। आसाराम पांच साल से भी ज्यादा समय से जोधपुर सेन्ट्रल जेल में बंद है। अब सजा स्थगन याचिका पर 6 मार्च को सुनवाई होनी है।

 

 

गौरतलब है आसाराम पर आरोप था कि उसने अपने गुरुकुल में पढऩे वाली एक नाबालिग छात्रा का जोधपुर के निकट मणाई स्थित आश्रम में अगस्त, 2013 में यौन उत्पीडऩ किया था। लंबी ट्रायल के बाद स्पेशल कोर्ट ने आसाराम को दोषी पाया था। सजा के खिलाफ भी आसाराम ने जुलाई, 2018 में 44 पेज की अपील पेश की थी, जिस पर राज्य सरकार को नोटिस जारी हो चुके हैं।

 

 

आपकों बता दें कि दुष्कर्म के मामले में सजा काट रहे आसाराम को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भी फिर झटका दिया है। हाईकोर्ट ने आसाराम बापू के ऋषिकेश स्थित आश्रम को वन भूमि पर अतिक्रमण कर बनाया हुआ मानते हुए वन विभाग को अतिक्रमित जमीन पर कब्जा लेने और अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने इसी के साथ आसाराम बापू की विशेष याचिका भी खारिज कर दी है। कोर्ट ने माना कि आश्रम ने वन भूमि पर कब्जा किया हुआ है। ऋषिकेश में ब्रह्मपुरी स्थित आसाराम बापू के आश्रम के खिलाफ वन विभाग की लीज 59 की जमीन पर कब्जा करने की शिकायत ऋषिकेश के ही रेन फारेस्ट हाउस निवासी स्टीफन और तृप्ति ने की थी।



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