गजेंद्रसिंह दहिया/जोधपुर. केंद्र सरकार ने राजस्थान के थार मरुस्थलीय क्षेत्र बाड़मेर और जैसलमेर में जल संरक्षण की परंपरागत तकनीक को अफ्रीकी देशों में लागू करने की पहल की है। इसके अंतर्गत खड़ीन, टांका, रूफ वाटर हार्वेस्टिंग जैसी तकनीक को नामीबिया, मोजाम्बिक, दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाबवे, बोत्सवाना व कांगो सहित अफ्रीका के दक्षिणी छोर पर बसे देशों को दी जाएगी।
दक्षिणी धु्रव-दक्षिणी धु्रव समझौते के अंतर्गत केंद्र सरकार ने अफ्रीकी महाद्वीप के दक्षिणी हिस्से में बसे देशों को कृषि व जल प्रबंधन की तकनीक देने का निर्णय किया है। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने शुष्क भूमि विकास के लिए जोधपुर में आयोजित चार दिवसीय विश्व की 13वीं अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में भाग लेने आए विश्व के सारे बड़े संस्थानों के महानिदेशकों के साथ बैठक की। उन्होंने लेबनान स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर एग्रीकल्चर रिसर्च इन ड्राई एरिया (इकारडा) के महानिदेशक एली अबौसाबा, इंटरनेशनल क्रॉप रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी एरिड ट्रोपिक्स (इक्रिसेट) के महानिदेशक डॉं. पीटर कारबेरी, सीमिट मैक्सिको के महानिदेशक डॉं. मार्टिन क्रोफ, इवमी श्रीलंका की महानिदेशक क्लोडिया सदोफ के साथ बैठक की। बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के दो पूर्व महानिदेशक टास अध्यक्ष डॉ. आरएस परोदा और नास अध्यक्ष डॉ. पंजाब सिंह के साथ काजरी निदेशक डॉ. ओपी यादव भी शामिल हुए।
अफ्रीकी देशों को पॉलिसी बनाने की सलाह
बैठक में शेखावत ने कहा कि राजस्थान में कुछ समय पहले ही इंदिरा गांधी नहर आई है, लेकिन यहां जल संरक्षण की परंपरागत तकनीकें कारगर थी। अफ्रीकी देशों में ये नहीं हैं। ऐसे में सबसे पहले अफ्रीकी देश की सरकारें इन तकनीक के संबंध में पॉलिसी बनाकर लागू करें ताकि पानी की किल्लत से छुटकारा मिल सके। बूंद-बूंद सिंचाई व फव्वारा सिंचाई के साथ पुरानी तकनीक पानी के लिए होने वाली लड़ाई को खत्म कर देगी।
क्या है दक्षिणी धु्रव समझौता
केंद्र सरकार ने दक्षिणी धु्रव-दक्षिणी धु्रव नाम से कार्यक्रम चलाया है। जिसके अंतर्गत दक्षिणी धु्रव की ओर स्थित अफ्रीकी देशों के साथ कृषि, जल व पर्यावरण की तकनीक शेयर कर उनके विकास में योगदान दिया जाएगा।
जानिए खड़ीन व टांके के बारे में
खड़ीन- थार मरुस्थल में खेत के किनारे बाड़ बनाकर कठोर भूमि पर वर्षा जल एकत्रित करना, खड़ीन कहलाता है। इससे पास स्थित खेत की फसल में नमी रहने के साथ सिंचाई भी मिलती है।
टांका- पेयजल व सिंचाई दोनों के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
रूफ वाटर हार्वेस्टिंग- वर्षा जल को छत के जरिए पाइप से नीचे टांके में एकत्रित करना रूफ वाटर हार्वेस्टिंग कहलाता है।
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