-सूर्यनगरी में 483 साल से चल रहा है जोधपुर राज्य का पंचांग
Story By KR Mundiyar
जोधपुर.
देश में सरकारी पंचांग में भी भले ही जोधपुर की स्थिति बदल गई, लेकिन 483 साल से हर साल प्रकाशित हो रहे एक पंचांग में सूर्यनगरी आज भी जोधपुर राज्य के रूप में सुशोभित है। चैत्र मास मेंं वितरित होने वाले इस पंचांग पर आज भी जोधपुर राज्य की सील व मुहर प्रकाशित होती है।
इस पंचांग का नाम चण्डू पंचांग हैं। इसकी शुरूआत जोधपुर राज्य (मारवाड़ मुल्क) में वर्ष 1536 में ज्योतिषाचार्य पंडित चण्डीदास पुरोहित (चण्डूजी) ने की थी। इनकी सातवीं पीढ़ी व तत्कालीन राजपरिवार मेंं राज ज्योतिष की पदवी से सुशोभित पंडित कैलाश जोशी वर्तमान में इस पंचांग की परम्परा को बनाए हुए हैं। जोशी परिवार की ओर से मेहरानगढ़ व उम्मेद पैलेस के पारिवारिक मुहुर्त संबंधी कार्य निष्पादित किए जाते हैं। पंडित जोशी के अनुसार इस पंचांग को तैयार करने में उन्हें छह माह लगते हैं, हर साल दिसम्बर तक आगामी वर्ष का पंचांग तैयार कर लिया जाता है। पंचांग की एक लाख से अधिक प्रतियां छपती है, जो देश-विदेश तक भेजी जाती है। इनकी ओर से एक पॉकेट पंचांग व कलेण्डर भी निकाला जाता है, जिसकी ढाई लाख प्रतियां देश भर में नि:शुल्क वितरित की जाती है।
सूर्य आधारित गणना का पहला पचांग-
पंडित कैलाश जोशी के अनुसार प्रदेश में यह एकमात्र पंचांग हैं, जिसको सूर्य आधारित काल की गणना से तैयार किया जाता है। शेष सभी पंचांग चन्द्रमा की काल गणना से तैयार किया जाते हैं। यह पंचांग सूर्य पर आधारित इसलिए हैं, क्योंकि काल की आत्मा सूर्य हैं और हिन्दू धर्म में कोई भी धार्मिक कार्य सूर्य के बिना संभव नहीं। सूर्य ही सभी राशियों का स्वामी भी हैं, इसलिए काल की गणना सूर्य से की गई।
जोधपुर राजघराने को दहेज में मिले थे चण्डूजी-
वर्ष 1535 मेंं जोधपुर राजघराने के राजा मालदेव का विवाह जैसलमेर राजघराने की राजकुमारी उमा देवी से हुआ था। तब जोधपुर राजघराने ने जैसलमेर राज ज्योतिष परिवार के पंडित चण्डीदास पुरोहित (चण्डूजी) को अपने यहां राज ज्योतिष बनाने के लिए दहेज के तौर पर मांग लिया था। तब ज्योतिषाचार्य यहां आ गए। वर्ष 1536 यानि विक्रम सम्वत 1593 में चण्डूजी ने यहां का पहला सूर्य आधारित पंचांग तैयार किया था। तब से चण्डूजी के वंंशजों का परिवार ही इसे तैयार करता है।
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