स्वाइन फ्लू से 107 मौतों के बाद अब डेथ केसों की ऑडिट कराने के आदेश

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जोधपुर.
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को जोधपुर संभाग में स्वाइन फ्लू से 107 मौतों के बाद डेथ केसों की ऑडिट समीक्षा करने की सुध आई हैं। ऐसी ऑडिट पहली मौत के बाद से शुरू कर दी जाती तो इतनी मौतें नहीं होती। डेथ क्यों हुई, के कारण तक पहुंचने के बाद स्वाइन फ्लू की नब्ज भी पकड़ आ जाती और जोधपुर संभाग मौत पर मौत का कहर नहीं झेलता।


देर आए दुरस्त आए, चिकित्सा विभाग ने अबस्वाइन फ्लू के कारण हुई मौतों की ऑडिट समीक्षा के आदेश जारी किए हैं। ऑडिट में प्रत्येक डेथ केस वाले मरीज में स्वाइन फ्लू से लक्षण, अस्पताल कब पहुंचा, क्या इलाज मिला, मौत क्यों हुई जैसे तमाम बिन्दुओं पर समीक्षा रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके लिए विभाग ने दो चिकित्सा अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई हैं।


चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बलवंत मंडा ने आदेश जारी कर बाप खण्ड के मुख्य चिकित्सा अधिकारी दाऊलाल चौहान, शेरगढ़ के चिकित्सा अधिकारी डॉ. विनोद कुमार को डैथ ऑडिट व एपेडेमोलोजिकल सर्वेलेंस के लिए मनोनीत किया है। इनके साथ डॉ. प्रतापसिंह को भी उनके साथ सहयोग के लिए जिम्मेदारी दी गई है। गौरतलब है कि जोधपुर जोन में इस साल जनवरी माह से अब तक 58 मरीजों की मृत्यु हो चुकी है। जनवरी माह में 39 मौतें और फरवरी माह में 19 मौतें हुई हैं। ज्ञात है कि जोधपुर ही ऐसा संभाग है, जहां पर स्वाइन फ्लू से सबसे अधिक मौतें हुई हैं।


गत साल से अब तक 107 मौतें-
वर्ष 2018 स्वाइन फ्लू का कहर सितम्बर माह में रफ्तार पकड़ चुका था। इससे पहले गत साल जनवरी से मार्च तक भी स्वाइन फ्लू से मौतों हुई थीं। बीते साल दिसम्बर माह के अंत तक 49 मरीजों की मृत्यु स्वाइन फ्लू से हो गए। स्वाइन फ्लू का यह कहर वर्ष 2019 के जनवरी व फरवरी माह तक भी जारी रहा। जनवरी माह में 39 मौतें और फरवरी माह में 19 मौतें हुई हैं। वर्ष 2019 में 18 फरवरी तक 58 मौतें हो गई और गत साल से अब तक 107 मौतें हो गई।


प्रमुख शासन सचिव व मंत्री ने जताई थी नाराजगी-
जोधपुर शहर में स्वाइन फ्लू के कहर को लेकर गत दिनों चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा एवं प्रमुख शासन सचिव हेमंत गेरा ने अस्पतालों का निरीक्षण किया था। उस समय प्रथम दृष्टया यह जानकारी सामने आई थी कि चिकित्सा विभाग की ओर से स्वाइन फ्लू पर काबू पाने में प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। इसको लेकर मंत्री व प्रमुख शासन सचिव ने गहरी नाराजगी जताते हुए सख्त निर्देश दिए थे। प्रमुख शासन सचिव ने चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए थे, जिन मरीजों की मृत्यु हो रही है, उसकी पूरी केस हिस्ट्री रिपोर्ट तैयार की जाएं कि मरीज अस्पताल आने से पहले कहां था, देरी से क्यों पहुंचा और अस्पताल पहुंच गया तो उसकी मृत्यु क्यों हो गए। मंत्री ने तो यह कहते हुए नाराजगी जताई थी कि स्वाइन फ्लू के मरीज तो जयपुर में भी आ रहे हैं और वहां पर इतनी मौतें नहीं हो रही है। तो फिर जोधपुर में इतनी मौतें क्यों हो रही है। मंत्री ने आशंका जताते हुए रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश भी दिए थे।



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