बिलाड़ा (जोधपुर). जिले में सर्वाधिक दूध उत्पादन करने वाले पशुपालकों के इस क्षेत्र में वर्षों पहले से खुले प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय में वरिष्ठ चिकित्सक का पद 12 वर्षों से रिक्त है और इस पद के एवज में यहां अनुबंध पर एक संविदा चिकित्सक है।
नोडल मुख्यालय पर वरिष्ठ चिकित्सक एवं सहायक चिकित्सकों के पद रिक्त रहने से पशुपालकों को सरकार की विभिन्न योजना का लाभ कम ही मिल रहा है तथा पशुपालक झोला छाप चिकित्सकों से अपने पशुधन का इलाज करवाने को मजबूर हैं।
और इन यह परेशानी उस समय और बढ़ जाती है जब इस क्षेत्र से वन्यजीवों के इलाज या पोस्टमार्टम के लिए जोधपुर रेफर करना पड़ता है।
रिक्त पड़े नोडल अधिकारी के अलावा यहां चपरासी एक पशुधन सहायक का पद भी रिक्त होने से कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण, निशुल्क दवा योजना, भामाशाह योजना का लाभ पशुपालकों को नहीं मिलता है। विभिन्न बैंकों से पशुओं पर ऋण लेने पर पशुओं के टेग लगाने के दौरान काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
क्षेत्र के सबसे पुराने एवं बड़े इस चिकित्सालय में राज्य सरकार की ओर से घोड़ा भी आवंटित किया हुआ था, जिसे क्षेत्र के अश्वपालकों को उनकी घोडिय़ों को लेकर भटकना नहीं पड़ता था तथा यहां घोड़े से प्रजनन हुआ करता था। यह बंद हो जाने से अश्व गर्भाधान प्रजनन योजना की इति श्री हो गई।
अनुबंध पर कार्यरत चिकित्सक दिनेश चौधरी जिनके पास अभी नोडल अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी है, ने बताया कि बिलाड़ा ब्लॉक मे कुल 19 सब सेंटर व चिकित्सालय है, जिनमें चार पद चिकित्सकों के रिक्त हैं वहीं लाम्बा व बाला गांव में कर्मचारी नहीं होने से छह महीने से सब सेंटरों पर ताले लगे हैं।
शल्य चिकित्सा एवं पोस्टमार्टम सुविधा नहीं
नोडल मुख्यालय होने के बावजूद यहां पशुओं की शल्य चिकित्सा की व्यवस्था नहीं है साथ ही कई बार समाजसेवी हरिण, कुरजां, मोर आदि को लेकर यहां आते है लेकिन उन्हें जोधपुर जाना पड़ता है।
इन्होंने कहा
नोडल अधिकारी का मुझे एक साल पहले चार्ज दिया गया वही मेरे पास खाारिया चिकित्सालय का भी चार्ज है जो भी योजना आती है उस योजना लोगों का बता दिया जाता है।
-डॉ. दिनेश चौधरी, संविदाकर्मी, पशु चिकित्सालय बिलाड़ा
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal http://bit.ly/2RMEDW5
0 comments:
Post a Comment