जोधपुर. जोधपुर स्थित भारतीय सेना की कोणार्क कोर की टुकड़ी का मालदीव के समुद्र में आतंकवाद से निपटने के लिए एक पखवाड़े से किया जा रहा ‘एकुवेरिन’ सैन्याभ्यास शुक्रवार को समाप्त हो गया।
दोनों देशों के मध्य सैन्य संबंध स्थापित करने और एक दूसरे के सैन्य अधिकारियों के बीच मध्य समझ विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित सैन्याभ्यास के विधिवत् समापन से एक दिन पूर्व गुरुवार को आयोजित समारोह में भारतीय जवानों को स्मृति चिह्न भेंट किए गए। इससे पहले वर्ष 2017 में भारत के बेलागनी में युद्धाभ्यास का आयोजन किया गया था।
मालदीवियन नेशनल डिफेंस फोर्स के साथ किए युद्धाभ्यास के दौरान कैंप में समुद्र के विभिन्न मॉडल बनाकर आतंकियों पर रेड करने और उन्हें खदेडऩे का प्रशिक्षण लिया। गौरतलब है कि गुजरात व महाराष्ट्र के पास पाकिस्तान से लगती लम्बी समुद्री सीमा है। दस साल पहले 26 नवम्बर 2008 को मुंबई में हुए बड़े आतंकवादी हमले में आतंकवादी कराची से समुद्र के जरिए ही मुम्बई में दाखिल हुए थे। इसके अलावा भारतीय मालवाहक जहाजों को सोमालिया सहित अन्य अफ्रीकी देशों के लुटेरों से बचाने के लिए भी सेना का यह अभ्यास महत्वपूर्ण है।
9 वां युद्धाभ्यास
भारतीय सेना और मालदीव की नेशनल डिफेंस फ ोर्स के बीच मालदीव के माफिलफूशी में 15 दिसम्बर से शुरू हुआ संयुक्त युद्धाभ्यास एकुवेरिन-2018 दोनों देशों के मध्य यह नवां युद्धाभ्यास था। इसमें जोधपुर की कोणार्क कोर की मद्रास रेजीमेंट ने हिस्सा लिया। मालदीव के चारों तरफ हिंद महासागर है। ऐसे में भारतीय सेना ने सामुद्रिक परिस्थितियों में ही एक पखवाड़े तक युद्धाभ्यास किया। इस दौरान मोटर बोट और जहाज के जरिए समुद्र के किनारे बसे द्वीपों पर रेसक्यू ऑपरेशन करने की तकनीकी सीखी गई। द्वीप पर आतंकवादी हमले और इस दौरान वहां सैन्य कार्यवाही के हालात पैदा कर अभ्यास किया गया। द्वीप में ऑपरेशन के दौरान वहां जंगल में रहने और वहां के खान-पान के साथ जीवन व्यापन करने की तकनीक व रणनीति भी बताई गई।
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