पर्यावरण विशेषज्ञ नहीं, जारी कर दी पर्यावरण स्वीकृतियां

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जोधपुर।

सरकार की ओर से गठित डिस्ट्रिक्ट एनवायरमेंट इंपेक्ट एसेसमेंट ऑथोरिटी (डिया) कमेटी की बहुत बड़ी गड़बड़ी सामने आइ है। इस डिया कमेटी ने पर्यावरण विशेषज्ञ के बिना ही खानधारकों को पर्यावरण स्वीकृतियां जारी कर दी। इस पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सख्त नाराजगी जताते हुए डिया कमेटी की ओर से जारी की जाने वाली इसी पर तुरन्त प्रभाव से रोक लगा दी है। जिले में विभिन्न क्षेत्रों में खनन कार्य के लिए पर्यावरण स्वीकृति (इसी) लेना अनिवार्य होता है। जिला स्तर पर यह इसी सरकार की ओर से गठित डिस्ट्रिक्ट एनवायरमेंट इंपेक्ट एसेसमेंट ऑथोरिटी (डिया) जारी करती है, लेकिन जब डिया कमेटी ही नियमों की धज्जियां उड़ाए तो पर्यावरण संरक्षण की उम्मीद बेकार है। इस कमेटी में जिला कलेक्टर सहित खनन, पर्यावरण, वन, सिंचाइ, राजस्व आदि विभागों के अधिकारी शामिल होते है। इस कमेटी का अध्यक्ष कलेक्टर होते है। कमेटी की ओर से पर्यावरण विशेषज्ञ की भूमिका महत्वपूर्ण होती है लेकिन इस डिया कमेटी में पर्यावरण विशेषज्ञ को शामिल ही नहीं किया गया। जिले में करीब 12 हजार क्वारी लाइसेंस (छोटी खानें, जो 1 हैक्टेयर से कम क्षेत्र में विकसित हो) चल रही है।

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नहीं होगी नई इसी जारी

एनजीटी के आदेश के बाद जिले में नइ इसी जारी करने पर रोक लग गई है। अब खानधारकों को आगामी आदेश तक नइ इसी जारी नहीं की जाएगी। इससे खानधारकों की परेशानियां बढ़ जाएगी। साथ ही, खनन कार्य प्रभावित होगा व बिना इसी जारी कराए खनन कार्य अवैध माना जाएगा। एेसे में खनन कार्यो पर भी तलवार लटक जाएगी।

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अब सिया व केन्द्रीय वन मंत्रालय से ले सकेंगे इसी

एनजीटी द्वारा डिया कमेटी पर इसी जारी करने पर रोक के बाद जिले के खानधारकों के सामने संकट आ गया है। खानधारकों को अब इसी के लिए जयपुर पर निर्भर रहना पड़ेगा। जहां स्टेट लेवल एनवायरमेंट इंपेक्ट एसेसमेंट ऑथोरिटी (सिया) कमेटी इसी जारी करेगी। सिया प्रदेश भर से आने वाले पर्यावरण स्वीकृति के आवेदनों को इसी जारी करने का काम करती है। एेसे में, यहां पर इसी देरी से जारी होंगी। इसके अलावा, नई दिल्ली स्थित केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से इसी जारी की जाती है।

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इसी की शर्ते भी प्रभावित होंगी

- खनन पट्टों में हवा-पानी की मॉनिटरिंग की जांच नहीं होंगी।

- खनन के दौरान क्षेत्र के हवा की क्वालिटी की जांच प्रभावित होंगी।

- खनन क्षेत्र में निस्तारित पानी, अपशिष्ट पानी आदि की जांच प्रभावित होंगी।

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डिया कमेटी में पर्यावरण विशेषज्ञ नहीं थे इसलिए एनजीटी के आदेशानुसार अब डिया कमेटी की ओर से नई इसी जारी नहीं की जाएगी।

श्रीकृष्ण शर्मा, माइनिंग इंजीनियर

जोधपुर



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