स्वाइन फ्लू का कहर जारी: दो जनों की और मौत, सात नए पॉजीटिव आए सामने

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जोधपुर.
संभाग में स्वाइन फ्लू बीमारी का खौफ बढ़ता जा रहा है। गुरूवार को स्वाइन फ्लू से दो मरीजों की मृत्यु हो गई। बीते एक सप्ताह में स्वाइन फ्लू छह मरीजों की जान ले चुका है। गुरूवार को नागौर जिले के मूंडवा निवासी बुजुर्ग तथा पाली निवासी मरीज की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। मरीजों का एमडीएम अस्पताल में स्वाइन फ्लू का इलाज चल रहा था। साथ ही गुरूवार को एमडीएम अस्पताल समेत अन्य अस्पतालों में भर्ती में तीन महिलाओं समेत कुल सात मरीजों की रिपोर्ट स्वाइन फ्लू पॉजीटिव आई है।

जानकारी के अनुसार नागौर जिले के मूंडवा क्षेत्र के आकला गांव निवासी हिम्मताराम (62) को 24 दिसम्बर को एमडीएम अस्पताल के आइसोलेटेड वार्ड में भर्ती किया गया था। भर्ती के समय से उनकी तबीयत खराब थी और इसलिए वेंटीलेटर पर रखा गया था। गुरूवार सुबह पौने एक बजे हिम्मताराम ने दम तोड़ दिया। इसी प्रकार पाली निवासी अब्दुल सलीम (55) को गुरूवार अलसुबह गंभीर हालत में भर्ती किया गया था। गुरूवार सुबह उसकी मृत्यु हो गई। सैम्पल की जांच में सलीम की रिपोर्ट स्वाइन फ्लू पॉजीटिव आई।

इधर, एमडीएम अस्पताल में स्वाइन के रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। एसएन मेडिकल कॉलेज में गुरूवार को 17 सैम्पलों की जांच की गई, जिसमें से सात मरीजों की रिपोर्ट पॉजीटिव आई। इनमें तीन महिलाएं जिला अस्पताल पावटा में भर्ती बीजेएस निवासी 48 वर्षीय व परिहार नगर जोधपुर निवासी 60 वर्षीय तथा एमडीएम अस्पताल में भर्ती नेवरा जोधपुर निवासी 74 वर्षीय है। इसके अलावा एम्स में भर्ती बासनी निवासी 65 वर्षीय, एमडीएम अस्पताल में भर्ती भोपालगढ़ निवासी 60 वर्षीय तथा पाली निवासी 55 वर्षीय व जोधपुर निवासी 56 वर्षीय पुरुष मरीजों की रिपोर्ट स्वाइन फ्लू पॉजीटिव आई है।

अब तक 10 मौतें-
गौरतलब है कि जोधपुर जिले में 01 जनवरी से 27 दिसम्बर तक 10 मौतें हो चुकी है और 190 पॉजीटिव मरीज सामने आ चुके हैं। आपको बता दें कि 22 दिसम्बर को एक ही दिन में तीन मरीजों की जान चली गई थी।

इसलिए हो रही मौतें!
स्वाइन फ्लू कोई भयानक या खतरनाक बीमारी नहीं हैं। यदि समय पर इसका इलाज लिया जाएं तो हर कोई मरीज ठीक हो सकता है। और आए दिन अधिकतर मरीज इलाज लेकर ठीक हो रहे हैं। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि इलाज के बावजूद मरीजोंं की जान क्यों जा रही है। तो इसके पीछे बड़ा कारण मरीज के अस्पताल देरी से पहुंचना है। संभाग या अन्य गांवों लोग सामान्य बुखार मानते हुए अपने स्तर पर दवा ले लेते हैं और स्वाइन फ्लू की जांच नहीं करवाते। ऐसे में उन्हें स्वाइन फ्लू का इलाज नहीं मिल पाता और स्थिति खराब हो जाती तब परिजन मरीज को एमडीएम अस्पताल लेकर पहुंचते हैं और अनियंत्रित स्थिति में मरीज की जान चली जाती है।

इन्हें हैं अधिक खतरा-
चिकित्सकों के अनुसार स्वाइन फ्लू का सबसे अधिक खतरा बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को हैं। ऐसे मरीजों को भीड़भाड़ क्षेत्रों में जाने से बचना चाहिए। थोड़ी सी खांसी या जुकाम होने पर अविलम्ब चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। ताकि यदि स्वाइन फ्लू के लक्षण होने पर इलाज लिया जा सकें।



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