अभिषेक बिस्सा/ जोधपुर . स्वच्छता सर्वेक्षण-2019 की टीम अब कभी भी जोधपुर में आकस्मिक निरीक्षण करने आ सकती है। गत सर्वेक्षण 2018 में जो गलतियां रहीं या निगम की ओर से जो कार्य अधूरे रहे, उन पर आज भी कुछ खास प्रयास नहीं हुए। डोर टू डोर कचरा संग्रहण से लेकर वेस्ट टू एनर्जी सहित कई तरह के प्लान निगम अब तक शुरू नहीं कर पाया है। इसके अलावा निगम ने इन कामों को लेकर जनजागरुकता जैसे अभियान तक नहीं चलाए हंै। गत सर्वेक्षण में हमारा जोधपुर टॉप-100 शहरों में भी अपनी जगह नहीं बना पाया था। जबकि साल 2017 की तुलना 2018 में जोधपुर की रैकिंग में तुलनात्मक सुधार आया था। इस बार निगम ने एक बार फिर से ऐनवक्त पर अपनी तैयारियां शुरू की हैं। देखने की बात ये होगी कि स्वच्छता सर्वेक्षण की टीम इस बार जोधपुर को कितने अंक देगी?
जानिए निगम के दावे और हकीकत
पब्लिक टॉयलेट दावा : नगर निगम ने शहर भर में पांच सौ पब्लिक टॉयलेट बनाए हैं। ये विभिन्न मार्केट व स्थानों पर बने हुए हंै।
हकीकत : ज्यादातर टॉयलेट गंदे पड़े हैं। इनकी कोई सुध लेने वाला नहीं है। यहां तक कि टॉयलेट महिलाओं के लिहाज से बिल्कुल काम के नहीं है। मजबूरन कई लोग इनके आसपास टॉयलेट का उपयोग करते हैं।
डस्टबिन दावा : नगर निगम ने शहर में स्मार्टबिन लगाए हैं। इसके अलावा गीला कचरा व सूखा कचरा के डस्टबिन लगाए हंै। कुछेक जगह रूटीन डस्टबिन भी पड़े हैं।
हकीकत : स्मार्टबिन की हालत ठीक है। दूसरी ओर गीला-सूखा कचरा का अधिकांश जगहों पर सिस्टम बिगड़ा पड़ा है। इनके आसपास आमजन व निगम सफाईकर्मी स्वयं कचरा फेंक देते हैं।
जन जागरुकता दावा : नगर निगम को जन जागरुकता के लिहाज से रोडवेज व रेलवे स्टेशन सहित तमाम जगहों के बाहर स्वच्छता संदेश देते फिल्मी सितारों के होर्डिंग व बैनर लगाने थे। होटलों को पाबंद कर कचरा कंपोजिट के प्लांट लगाने थे। इस पर काम शुरू किया है।
हकीकत : हर रोज सौ किलो कचरा तैयार रखने वाले होटलों के बाहर कचरा कंपोजिट प्लांट नहीं लगे। इस पर काम अब शुरू हो रहा है और बैठकों में निर्देश दिए जा रहे हैं। केरू में भी कंपोजिंट संबंधित ऐसे कोई विशेष प्लांट नहीं है। जो नॉम्र्स पर खरे उतर पाए। निगम होर्डिंग व बैनर लगाने के लिए अब चेता है।
फील्ड वर्क में निगम आगे
स्वच्छता सर्वेक्षण के निरीक्षण को लेकर अभी तक कोई तिथि नहीं आई है। जनवरी के बाद ही टीम आएगी। डॉक्यूमेंटेशन का काम पूरा हो गया है। जिसमें संसाधन की जानकारी, कचरा प्वाइंट, कचरे को ले जाने की जानकारी व बाद में उसका उपयोग आदि की जानकारी दी गई है। अब फील्ड वर्क में बहुत चीजें हैं। जिसमें डोर टू डोर कलेक्शन, वार्ड में कर्मचारियों की संख्या, डस्टबिन व स्मार्टबिन है। जबकि निगम फील्ड में बहुत आगे है। डोर टू डोर के लिए सभी टैंडर होते ही काफी नंबर मिलेंगे। पब्लिक फीडबैक के काफी नंबर है। स्वच्छता एप के फीडबैक भी मायने रखेंगे। सीएसआई के पास स्वच्छता का ऐप डाउनलोड हो गया है। रोज की शिकायतों का निवारण भी कर रहे हैं।
- राहुल गुप्ता, नगर निगम से नोडल अधिकारी, स्वच्छता सर्वेक्षण-2019
महापौर घनश्याम ओझा से 5 सवाल
1.पिछले चार साल में सफ ाई व्यवस्था सुधार के लिए आपने प्रमुख कार्य क्या किए?
महापौर- हमने 19 सौ सफाई कर्मचारियों की भर्ती की है। इनमें 14 सौ ने काम संभाल लिया। सीवरेज मामले में अमृत योजना के तहत 5 करोड़ के काम किए। पार्ट द्वितीय जल्द शुरू होगा। सीवरेज के पानी को ट्रीट करने का काम शुरू किया।
2.स्वच्छता सर्वेक्षण की रैकिंग में हर बार जोधपुर की स्थिति खराब है, यानी हम बहुत पीछे हैं, इसके आप प्रमुख कारण क्या मानते हैं?
महापौर- पीएम नरेन्द्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 के बाद रैंकिंग का कार्य शुरू किया। जोधपुर की रैंकिंग शुरुआत से अच्छी नहीं आ रही है, लेकिन धीरे-धीरे अच्छी रैंक की ओर से बढ़ रहे हैं। 2019 में और ज्यादा सुधरेगी। रैंकिंग सुधार के लिए ऑनलाइन वर्क व कार्यालय में जनता के काम और जनता का फीडबेक है। पब्लिक फीडबेक में निगम मात खा रहा है।
3.आप शहर की सफ ाई को लेकर 100 में से कितने अंक देना पसंद करेंगे?
महापौर- मैं मुख्य रोड के लिए तो 100 में से 90 अंक दे सकता हूं। साइड रोड में 70 और छोटी गलियों के बिल्कुल नंबर देने को तैयार नहीं हूं। लोगों से निवेदन है कि अपने घर का कचरा सुबह 8 बजे डाल दें, ताकि समय पर दिनभर का कचरा उठ जाए।
4. राज्य के कई शहरों में सूखा व गीला कचरा अलग-अलग एकत्रित किया जा रहा है, लेकिन जोधपुर इस मामले में पूरी तरह से फेल साबित हो रहा है?
महापौर- सेंसर डस्टबिन हमने शहर में करीब 35 जगह लगाए हैं। ये काम हमारा छह माह पहले शुरू होना था, लेकिन दो माह पहले शुरू हुआ। योजना अच्छी चल रही है। ये काम अभी भी ट्रायल बेस पर है। अपील है कि स्मार्ट डस्टबिन के आसपास कचरा नहीं डाले। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सोच है कि शहर में किसी तरह के कचरा पात्र नहीं होने चाहिए। जब हम डोर टू डोर कचरा इकट्टा कर रहे है तो फिर कचरा रोड पर क्यों आए। डोर टू डोर सफल रहा तो इस तरह के कचरा पात्र की जरूरत नहीं पड़ेगी।
5. क्या इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण में जोधपुर की स्थिति में कुछ सुधार हो पाएगा ?
महापौर- डोर टू डोर का पुराना अनुभव रहा। रामकी और कनक ने पिछले बोर्ड के समय काम किया। कुछ तकनीकी व वित्तीय कारणों के कारण काम आगे बढ़ नहीं पाया। पुरानी तकलीफें वापस न हो, इसी सोच के साथ हमने काम किया था। हमने तीन बार टैंडर किया, किसी ने भाग नहीं लिया। बड़े कांटे्रक्टर आते तो वे भी स्थानीय कांटे्रक्टर को काम सबलेट करते हैं। चार-चार वार्डों का कलस्टर बनाकर काम शुरू किया। ऐसे कुल 15 कलस्टर बनाए हैं। वार्ड संख्या 3, 6 7 व 8 में काम सही चला। बाकी दो कलस्टर के टैंडर अब हमारे फाइनल होंगे। ये काम 1 जनवरी से शुरू हो जाएंगे। शेष कलस्टर के री टैंडर किए हैं, जिनके टैंडर खुल जाएंगे। 65 वार्ड डोर टू डोर से जुड़ जाएंगे।
गत बार यूं रहे थे पीछे और अब क्या?
1. निगम व वार्डों में बायोमेट्रिक अटेडेंस नहीं।
इस बार- कुछ वार्डों में है और कुछ में नहीं।
2. कर्मचारियों की दो बार अटैंडेस नहीं होना।
इस बार- दो बार अटैंडेंस हो रही है।
3. वार्डों की दो बार सफाई नहीं।
इस बार- दो टाइम सफाई का कार्य शुरू हो गया है।
4. डोर टू डोर कलेक्शन की स्कीम नहीं।
इस बार- चार वार्डों में कलस्टर बनाकर काम शुरू किया गया, शेष की अब निविदा निकल रही है। यहां कमजोर साबित होने की आशंका।
5. वेस्ट टू एनर्जी प्लांट शुरू नहीं हो पाया।
इस बार- एक निजी फर्म के साथ एग्रीमेंट हो गया, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ।
6. निगम की सेवाएं ऑनलाइन नहीं हुई।
इस बार- नाम ट्रांसफर, बैंक एनओसी व तीसरी सेल परमिशन ऑनलाइन हुई। शेष कई काम में पीछे हैं।
7. आमजन ने दिया बहुत कम फीडबेक।
इस बार- ये जनता पर निर्भर है।
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