के. आर. मुंडियार
जोधपुर.
चुनावी साल में सरकार ने प्रदेश के गांवों के विकास के लिए नई इबारत लिखी है। सरकारी बजट के बोझ को कम करने के लिए सरकार ने गांवों के विकास में अब जनसहभागिता भी अनिवार्य कर दी है। केन्द्र व राज्य सरकार की योजनाओं के अलावा ग्राम पंचायतों में जनसहभागिता के जरिए विकास कार्य करवाए जाएंगे। पंचायतराज विभाग ने सभी जिला परिषदों को प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम विकास समिति का गठन करने के निर्देश दिए हैं। यह समिति ट्रस्ट की तरह काम करेगी। समिति गठन के बाद ग्राम पंचायतों के सरपंच व सचिव अपनी मनमर्जी नहीं कर सकेंगे। क्योंकि गांवों के विकास में ग्राम विकास समिति का अहम रोल होगा। समिति सदस्यों की सलाह व सुझावों के अनुरूप ही गांवों में विकास की दिशा तय होगी। पिछले माह जयपुर में आयोजित वीसी में ग्रामीण विकास एवं पंचायतराज विभाग के आयुक्त ने निर्देश दिए थे कि अविलम्ब सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम विकास समिति का गठन किया जाए। निर्देश की पालना में सभी जिला परिषदों ने इसके लिए कार्यवाही शुरू कर दी है। इस माह होने वाली वीसी में इसकी पालना रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी है।
ऐसा रहेगा समिति का स्वरूप-
समिति में कोई भी स्वेच्छा से सदस्य बन सकता है। समिति सदस्य गांव के मूल निवासी होंगे, जिसमें सरकारी लोकसेवक अधिकारी/कर्मचारी या सरकारी सेवा से सेवानिवृत व्यक्ति, निजी सेवा के अधिकारी या कर्मचारी होंगे। वार्ड पंच स्वत: ही सदस्य होंगे। समिति में अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष तथा सचिव का पद भी होगा। जिसको सर्वसम्मति से चुना जाएगा। समिति का पंजीयन सहकारिता विभाग में करवाना होगा। समिति के सदस्य वार्षिक चंदा एकत्र करेंगे। संग्रहित राशि बैंक खाते में ग्राम विकास कोष में जमा करवाई जाएगी। समिति के सदस्य या कोई भी अधिकारी अपनी इच्छा से ग्राम विकास कोष में एक माह की ग्रेड पे के बराबर राशि जमा करवा सकेगा।
बैठकें और रिकार्ड संधारण होगा-
समिति की बैठक साल में कम से कम 4 बार आयोजित की जाएगी। संभवत: बैठकेंं किसी त्योहार पर ही होंगी। ताकि त्योहार के समय सभी लोग गांव में ही रहते हैं और समिति का वार्षिक लेखा-जोखा भी आसानी से हो सकेगा। समिति के कोष में जमा होने वाली राशि का पूरा लेखा-जोखा रखा जाएगा। जो व्यक्ति समिति में चंदा राशि जमा कराएगा। उसको रसीद दी जाएगी। समिति की बैठकों का कार्यवाही विवरण आदि दर्ज किया जाएगा।
समिति की सलाह से होंगे काम
-ग्राम पंचायत विकास योजना के तहत किए जाने वाले कार्यों का प्राथमिकता से चिह्नीकरण करने के लिए सलाह देना।
-गांव में विद्यालय, आगंनवाड़ी, अस्पताल एंव अन्य सरकारी कार्र्यों के लिए सलाह देना।
-गांव में सार्वजनिक परिसम्पतियों की देखरेख करना।
-गांव में स्थित वृद्धजन की कल्याण के लिए योजना बनाने में सलाह देना।
-गांव में सर्वाधिक गरीब लोगों के उत्थान के लिए सलाह-मशविरा करना।
-केन्द्र एवं राज्य सरकार की सभी जनकल्याणकारी विकास योजनाओं एंव व्यक्तिगत लाभ की योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों को देना।
-उस गांव में स्वच्छता बनाए रखने के लिए सलाह व सुझाव देना।
-गांव के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को स्कॉलरशिप अथवा पुरस्कार प्रदान करना।
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