बांध किनारे प्यासी जनता, चुनाव में मांगेगी हिसाब

पोस्ट पसंद आये तो लाइक जरुर करे ?

बिलाड़ा विधानसभा क्षेत्र

के. आर. मुण्डियार
जोधपुर.
जिले का दूसरा बड़ा बिसलपुर बांध कुछ दशक पहले जब बरसाती पानी से भरा रहता था, तब न केवल बिसलपुर बल्कि बांध के नीचे बसे दर्जनों गांवों के लोग खेती-बाड़ी के कारोबार से ही निहाल हो रहे थे। लेकिन कुछ दशक पहले बिसलपुर बांध के ऊपर दूसरा बांध बना देने के बाद बिसलपुर बांध परिक्षेत्र में अब सिंचित खेती तो दूर जनता पीने के पानी को ही तरस रही हैं।


यह टीस दो चुनाव पहले बिलाड़ा विधानसभा मेंं शामिल हुए लूणी व मंडोर पंचायत समिति के गांव बिसलपुर, डांगियावास, पालासनी, मोरटूका, मियासनी, पीथावास, बिनावास, दांतीवाड़ा आदि गांवोंं की है, जहां के अधिकतर किसान पुश्तैनी कृषि कार्य छोड़कर कई सालों से अन्य प्रांतों में रोजगार के लिए घुमक्कड़ जीवन जीने के लिए मजबूर हैं। लोगों से चुनाव चर्चा की तो उनका दर्द छलक पड़ा।


बिसलपुर गांव के नवचौकिया पर बैठे शिक्षित किसान डूंगरसिंह पांगा ने कहा कि मौसम आधारित एक फसल पकती है तो उसका दाम भी पूरा नहीं मिलता। समर्थन मूल्य की खरीद में भी 25 क्विंटल की बाध्यता है। बचा अनाज किसान को बिचौलियों को बेचना पड़ता है। किसान बेचारे करें तो क्या करें? युवा पुखराज ने कहा कि चुनाव आते हैं तो नेता लोग झूठे वादे कर अपनी रोटियां सेक लेते हैं और चार साल तक कोई आकर यह तक नहीं पूछता कि जिन किसानों ने झोली भर वोट दिए, वो सुखी है या नहीं।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब 21 वीं सदी में भी कई ढाणियां बिजली-पानी की सुविधा से वंचित है। किसान भंवराराम व रामसुख ने कहा कि इस बार यदि तीसरे मोर्चे के रूप में सशक्त विकल्प मिला तो दोनों ही भाजपा व कांग्रेस को सबक सिखा देंगे। मैन बाजार में पवन झंवर, जबार, युवा छोगाराम, सांवर ने कहा कि गांव के लोग बीस साल से घरेलू पानी कनेक्शन का इंतजार कर रहे हैं। इस बार जनता चुनाव में नेताओं को पानी-पानी कर देगी।
पालासनी-मोरटूका रोड पर मिले बिनावास के प्रधान चौधरी व दांतीवाड़ा गांव में भैराराम ने कहा कि मीठड़ी नदी पर बिसलपुर बांध के ऊपर सरकार ने जालीवाड़ा बांध बना दिया। इसके बाद बिसलपुर बांध से खुशहाल रहने वाले दर्जनों गांवों की खेती चौपट हो गई। सरकार व नेता इसके बारे में कुछ नहीं सोच रहे कि आखिर बिसलपुर में अरबों की लागत से बने बांध की उपयोगिता क्या रहेगी? एक जमाना था जब बिसलपुर व आस-पास के गांवों में बहन-बेटियों का रिश्ता करने के लिए लोग शान समझते थे, लेकिन अब हालात विपरित हैं।

बिसलपुर के कोर्ट गली में बाबूलाल सोलंकी व सागरराम सांखला ने कहा कि कई पंचायतों के लोगों को एक शिकायत के समाधान के लिए पाली लोकसभा, जोधपुर तहसील, बिलाड़ा विधानसभा व मंडोर पंचायत समिति मुख्यालय तक करीब 200 किलोमीटर का चक्कर काटना पड़ता है। बुजुर्ग सदीक बा बोले, पाणी री मोटी परशाणी है, ई बार मालिक री आवाज सुण हीज वोट देवां। भंवरलाल बडियासर ने सवाल किया, पालासनी से मोरटूका तक सड़क कई सालों से क्षतिग्रस्त है, क्या नेताओं को यह परेशानी दिखाई नहीं देती।


डांगियावास बस स्टैण्ड पर प्रवीण चौधरी, नत्थाराम व सलीम खान ने कहा कि जोधपुर से लेकर जयपुर तक के नेता यहां रूकते हैं। क्षेत्रीय सांसद, विधायक ने झूठे वादे किए, चार साल में भी यहां उप तहसील को तहसील का दर्जा नहीं दिला पाए और न ही पंचायत समिति खुलवा पाए। कई गांवों में पेयजल संकट के कारण लोग गले तक भरे हुए हैं। इसलिए इस बार बदली हुई हवा बहेगी। वहीं राजू डांगी ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय किसान परेशान थे, भाजपा सरकार कुछ हद तक किसानों को राहत देने में समर्थ रही है। सरकार तो भाजपा की ही बननी चाहिए। समर्थन मूल्य पर अनाज खरीदने की मात्रा 20 की जगह 40-50 क्विटंल की जानी चाहिए।

युवा परमेश्वर डांगी बोले, इस बार चुनाव में युवाओं की अहम भूमिका रहेगी। क्योंकि गांव के युवा विभिन्न मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन नेताओं व अफसरों ने उनकी एक नहीं सुनी। किसान लूणाराम देवासी व रामचन्द्र कागट ने कहा कि गांव में पानी की टंकी बनी हैं, लेकिन गांव में सप्लाई नहीं हैं। अन्य गांवों में यहां से पानी जा रहा है। इस बार जब नेता वोट मांगने आएंगे तो गांव की उपेेक्षा का हिसाब जरूर मांगेंगे।


कई गांवों की अहम समस्याएं-
-11 साल पहले अन्तिम समय मीठड़ी नदी पर बना बिसलपुर बांध पूरा भरा था, उसके बाद बांध में पानी नहीं आ रहा, इससे यहां का कृषि कारोबार पूरी तरह से प्रभावित हैं।
-नए परिसीमन के बाद कई गांवों का लोकसभा, विधानसभा, पंचायत समिति, तहसील क्षेत्र अलग-अलग होने से परेशानी बढ़ रही है।
-जेडीए क्षेत्राधिकार के गांवों में ग्राम पंचायतें अपनी मर्जी से कुछ भी काम नहीं करा पा रही हैं।
-बिसलपुर से रूड़कली तक मार्ग पर कई सालों से सड़क नहीं बन पा रही है। बिसलपुर फांटा से पाली को जोडऩे वाली सड़क पालासनी से मोरटूका तक बहुत खराब है।
-बिसलपुर गांव में वर्षों पुरानी टंकी भी बिना पानी चढ़ाए गिरानी पड़ी, नई टंकी बने हुए काफी समय हो गया, लेकिन गांव के लोग घरेलू कनेक्शन को तरस रहे हैं।
-डांगियावास में पानी की टंकी बनी हुई, गांव में कनेक्शन नहीं मिल रहे हैं, लेकिन इसी टंकी से दूसरे गांवों में जलापूर्ति हो रही है।
-मीठड़ी व लूणी नदी में रोक के बावजूद रात के समय अवैध रूप से बजरी खनन नहीं थम रहा है। क्षेत्र के थानों की पुलिस की मिलीभगत है।
-बिरामी, पीथावास, लोलावास, काकेलाव के लोग विकास को तरस रहे।



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2P9TEk8
Share on Google Plus

About Atul

This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.

0 comments:

Post a Comment