गहलोत के ‘गढ़’ में कांग्रेस के लिए ये 4 चार सीटें बनी चुनौती, पिछले तीन चुनाव में यहां भाजपा ने लगाई जीत की हैट्रिक

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अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव अशोक गहलोत के गढ़ जोधपुर में चार विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां लगातार तीन विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का प्रत्याशी जीतता आ रहा है। इस बार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती भी ये चार सीटें ही हैं। पिछले तीन चुनाव से भाजपा को जीत का सेहरा बंधवाने वाली ये सीटें जोधपुर शहर, सूरसागर, बिलाड़ा व शेरगढ़ विधानसभा क्षेत्र की हैं। कांग्रेस के लिए जहां ये हॉट सीटें हैं, वहीं भाजपा फिर से यहां जीत की पताका फहराने के लिए जद्दोजहद कर रही है।

जोधपुर शहर : कांग्रेस ने खेला नया जाति कार्ड
जोधपुर शहर विधानसभा क्षेत्र में लगातार गत तीन चुनाव से कांग्रेस यह सीट नहीं बचा पा रही है। वर्ष 2003 में कांग्रेस से दिवंगत जुगल काबरा मैदान में थे, ये चुनाव सूर्यकांता व्यास 3076 मतों से जीती। वर्ष 2008 में परिसीमन के बाद इसी सीट पर भाजपा के कैलाश भंसाली से कांग्रेस के जुगल काबरा 8599 मतों से हारे। इसके बाद कांग्रेस ने चेहरा बदलते हुए सुपारस भंडारी को मैदान में उतारा, लेकन वे भी भंसाली से 14510 मतों से हारे।

इस बार : भाजपा ने जहां विधायक कैलाश भंसाली के भतीजे अतुल को मैदान में उतारा है, वहीं कांग्रेस ने अपनी रणनीति बदल ली और ओबीसी प्रत्याशी मनीषा पंवार पर दावं खेला है।

सूरसागर : कांग्रेस ने फिर बदला चेहरा

विधानसभा चुनाव के लिहाज से साल 2003 तक सूरसागर विधानसभा क्षेत्र आरक्षित था। यहां पर भाजपा के मोहन मेघवाल ने कांग्रेस के भंवर बलाई को 5785 मतों से हराया। बदले परिसीमन के कारण भाजपा ने यहां साल 2008 में सूर्यकांता व्यास को टिकट दे दिया। दूसरी ओर कांग्रेस ने शहर जिला कांग्रेस कमेटी जिलाध्यक्ष सईद अंसारी को मैदान में उतारा, जो सूर्यकांता व्यास से 5151 मतों से हारे। साल 2013 में सूर्यकांता के सामने जैफू खां मैदान में उतरे, जो भी 20745 मतों से हार गए।

इस बार : भाजपा ने अपनी रणनीति में कोई बदलाव नहीं किया है। यहां फिर से सूर्यकांता को ही टिकट दिया है। वहीं कांग्रेस ने लगताार तीसरी बार मुस्लिम प्रत्याशी पर ही दावं खेला है। केवल चेहरा बदल दिया है।


शेरगढ़ : कांग्रेस ने खेला महिला कार्ड

शेरगढ़ विधानसभा क्षेत्र में लगातार तीन चुनाव बाबूसिंह राठौड़ जीत रहे हैं। यहां बाबूसिंह राठौड़ के सामने खेतसिंह राठौड़ 2003 में 11 हजार 5 सौ 67 मतों से हार गए। इसके बाद साल 2008 में उम्मेदसिंह राठौड़ 2302 वोटों से हारे। वर्ष 2013 में बाबूसिंह से उम्मेद सिंह 6327 मतों से हारे।

इस बार : भाजपा ने लगताार तीन बार के विजेता बाबूसिंह राठौड़ को ही मैदान में उतारा है। वहीं कांग्रेस ने रणनीति तो बदली है, लेकिन दो बार हारे प्रत्याशी के स्थान पर उनकी पत्नी पर दावं खेला है।

बिलाड़ा : फिर वही चेहरे

इस विधानसभा क्षेत्र में साल 2003 में भाजपा के रामनारायण डूडी ने राजेन्द्र चौधरी को 17557 मतों से हराया। इसके बाद ये सीट आरक्षित हो गई। इसके बाद साल 2008 में अर्जुनलाल गर्ग ने कांग्रेस के शंकरलाल को 14863 मतों से हराया। यहां कांग्रेस ने चेहरा बदलते हुए 2013 में देहात जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हीराराम मेघवाल को चुनाव मैदान में उतारा, जो भी 35941 मतों से हार गए।

इस बार : भाजपा व कांग्रेस ने कोई रणनीति नहीं बदली है। पिछली बार के चुनाव खिलाडिय़ों को मौका मिला है। दोनों प्रत्याशी एक बार फिर से आमने-सामने हैं।



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