जोधपुर. कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टे्रड इन एनडेंजर्ड ऑफ वाइल्ड फ ाउना एंड फ्लोरा (साईटस) की सूची से शीशम की लकड़ी के उत्पादों को हटाने के प्रयास जारी हैं। उम्मीद है सकारात्मक परिणाम आएंगे। यह बात एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फोर हैण्डीक्राफ्ट्स (ईपीसीएच) के कार्यकारी निदेशक राकेशकुमार ने कही। केन्द्रीय वन मंत्रालय, साइटस मैनेजमेंट ऑथोरिटी इंडिया के अतिरिक्त महानिदेशक की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में उन्होंने बताया कि साइटस ने वर्ष 2016 में शीशम को प्रतिबंधित उत्पादों की सूची में डाल दिया था। इसकी वजह से शीशम से बने उत्पादों के निर्यात के लिए वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) से साइट्स परमिट या इसके समकक्ष प्रमाण पत्र ईपीपीसीएच से वृक्ष शिपमेंट सर्टिफि केट लेना आवश्यक किया था। परिषद ने समय-समय पर प्रयास किए हैं। ताकि इनके उत्पादों के निर्यात में साइटस अनुमति या समकक्ष प्रमाण पत्र लेने की अनिवार्यता से बचा जा सके।
उन्होंने बताया कि ईपीसीएच के आंतरिक आंकलन के मुताबिक शीशम खतरे में पड़ी प्रजाति नहीं है। ईपीसीएच के चेयरमैन ओपी प्रहलादका ने बताया कि शीशम और रोजवुड को साइटस सूची में शामिल करने से इनके निर्यात में नुकसान हुआ है। ईपीसीएच प्रयास कर रहा है कि दोनों प्रजातियों से बने उत्पादों के निर्यात में बाधा उत्पन्न न हो। बैठक में बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से तैयार नॉन डिट्रिमेंटल फाइडिंग स्टडी (एनडीएफ) पर चर्चा की गई। इस स्टडी के आधार पर पर्यावरण व वन मंत्रालय ने शीशम को साइटस की सूची से हटाने के बारे में प्रस्ताव पेश करने का निर्णय लिया गया।
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